Iran US Ceasefire: ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर का ऐलान हो गया है. इस बीच, ईरान ने ट्रंप के सामने 10 शर्तों का एक प्रस्ताव पेश किया था. दोनों देशों के बीच युद्धविराम की घोषणा तभी की गई, जब इन शर्तों को स्वीकार कर लिया गया. आखिर, क्या ईरान होर्मुज पर अपना नियंत्रण बनाए रख पाएगा? यह जानने के लिए पूरी खबर पढ़ें.
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US Iran Ceasefire: ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर का ऐलान हो गया है. इस ऐलान बाद मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष समाप्त हो गया है. ईरान ने भी इस युद्धविराम प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी है. इस समझौते को करवाने में पाकिस्तान ने एक अहम भूमिका निभाई है. अब सबसे अहम सवाल यह है कि दोनों देशों के बीच सीजफायर का ऐलान हो गया है, लेकिन क्या ईरान 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा, या फिर यथास्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा? इसके साथ ही, कई और भी सवाल हैं जिनके जवाब लोग जानना चाहते हैं. तो आइए हम आपको बताते हैं.
दरअसल, ईरान की तरफ से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक व्यापक प्रस्ताव दिया गया है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव को खत्म करना है. इस प्रस्ताव में कई अहम शर्तें शामिल हैं, जो ईरान की सुरक्षा, आर्थिक स्थिति और क्षेत्रीय प्रभाव को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं. प्रस्ताव के मुताबिक, अमेरिका भविष्य में कभी भी तेहरान पर हमला नहीं करेगा. साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर ईरान का नियंत्रण बना रहेगा, जो वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है.
इन शर्तों पर सीजफायर का ऐलान
ईरान ने अपने यूरेनियम एनरिचमेंट प्रोग्राम को जारी रखने की भी मांग की है. इसके अलावा, ईरान ने अमेरिका से सभी प्रकार के प्रतिबंध हटाने की शर्त रखी है. इसमें प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों तरह के प्रतिबंध शामिल हैं. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सभी प्रस्तावों को खत्म करने की भी बात कही गई है. ईरान ने युद्ध के कारण हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग भी रखी है. साथ ही, मिडिल ईस्ट से अमेरिकी फौज हटाने और क्षेत्र में सभी मोर्चों पर जंग खत्म करने की बात कही गई है, जिसमें हिज़्बुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई भी शामिल है.
ईरान के विदेश मंत्री ने क्या कहा?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने सोशल मीडिया पर कहा, "दो हफ़्तों की अवधि के लिए, तकनीकी समन्वय के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग संभव होगा." हालांकि, अपने बयान में उन्होंने जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाज़ों से टोल वसूलने के संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की. यह बयान इस बात का संकेत है कि ईरान फिलहाल तनाव कम करने की ओर झुका हुआ है, फिर भी वह पूरी तरह से पीछे हटने को तैयार नहीं है.
होर्मुज पर अभी भी है ईरान का कंट्रोल
होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे संघर्ष का सबसे अहम केंद्र बना हुआ है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20 फीसद तेल इसी रास्ते से गुजरता है. इस रास्ते में रुकावट आने से तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ा, जिससे वैश्विक बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ीं और आर्थिक मंदी का खतरा बढ़ गया. इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है. इस ऐलान के बाद ईरान और अमेरिका एक दूसरे पर हमला नहीं करेगा. ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने अपने सभी सैन्य लक्ष्य हासिल कर लिए हैं और अब वह एक लंबे समय तक चलने वाले शांति समझौते को पक्का करने के करीब है.
पाकिस्तान की भूमिका अहम
इस प्रस्ताव में पाकिस्तान की भूमिका को भी अहम माना जा रहा है. ट्रंप के मुताबिक, यह संघर्ष-विराम पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ बातचीत के बाद ही मुमकिन हो पाया. इस घटनाक्रम के बाद अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत इस्लामाबाद में शुरू होने की उम्मीद है, जिससे भविष्य के समझौतों का रास्ता खुलेगा.