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Afghanistan Pakistan War News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते दिनों 'नोबेल शांति पुरस्कार' पाने की इच्छा जताई थी. ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने कई भारत-पाकिस्तान समेत कई देशों के बीच हो रही जंग को रुकवाया है. अपने दावों, बयानबाजियों और बड़बोलेपन की वजह से एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति सुर्खियों में हैं. ऐसा लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप 'नोबेल' लेकर ही रहेंगे. इसकी वजह यह है कि उन्होंने कहा है कि वे अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सुलह कराना चाहते हैं.
डोनाल्ड ट्रंप ने यह बयान थाईलैंड और कंबोडिया के बीच हुए सीजफायर समझौते के मौके पर दिया. ट्रंप ने कहा कि जैसे उन्होंने कई देशों के बीच शांति समझौते करवाए, वैसे ही अब वे अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच स्थायी शांति स्थापित कराना चाहते हैं. ट्रंप का दावा है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में सात जंगों को रुकवाया और अब उनकी कोशिश है कि दक्षिण एशिया के इस हिस्से में भी स्थिरता लाई जाए.
इसी सिलसिले में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच दोहा में सीजफायर समझौता हुआ था, लेकिन इस समझौते के बाद भी दोनों देशों के बीच तनाव और हिंसक झड़पें जारी हैं. जानकारी के मुताबिक, 18 और 19 अक्टूबर को दोहा में हुए इस समझौते के दौरान यह तय किया गया था कि सीजफायर की स्थिति पर निगरानी के लिए नियमित बैठकें होती रहेंगी.
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के अधिकारियों की अगली बैठक तुर्किए (तुर्की) में होने वाली थी, लेकिन दोनों पक्षों के बीच 'मसौदा प्रस्तावों' को लेकर इत्तेफाक नहीं बन पाई है. इसी वजह से बातचीत ठप पड़ी हुई है. फिर भी कतर और तुर्किए लगातार कोशिशें कर रहे हैं कि दोनों देशों के बीच बातचीत से मामला सुलझ जाए.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीजफायर समझौते के लागू करने और इसकी निगरानी, उल्लंघनों के आंकलन और दोनों पड़ोसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को आसान बनाने के लिए 'चार-पक्षीय चैनल' (Four-Party Channel) बनाने का सुझाव दिया गया है. अफगानिस्तान मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, काबुल प्रतिनिधिमंडल ने अपना एक मसौदा प्रस्ताव मध्यस्थों के जरिए इस्लामाबाद प्रतिनिधिमंडल को सौंपा और पाकिस्तान की ओर से भी ऐसा ही किया गया.
रिपोर्ट में बताया गया कि अफगानिस्तान ने मांग रखी है कि पाकिस्तान उसके हवाई क्षेत्र और जमीन की सीमाओं का उल्लंघन न करे और पाकिस्तान को अफगानिस्तान के विरोधी समूहों को अपने क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए. वहीं, पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, देश के सुरक्षा अधिकारियों ने कहा है कि इस्लामाबाद के प्रतिनिधिमंडल ने दोहा बैठक में अपनी अंतिम स्थिति अफगान प्रतिनिधियों के सामने रख दी है.
इस बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने फिर से अफगानिस्तान को चेतावनी दी है कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ, तो खुला युद्ध हो सकता है. गौरतलब है कि दोहा में हुई इस वार्ता में पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई खुद ख्वाजा आसिफ ने की थी.