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Nigeria News Today: अमेरिका की सरपरस्ती में दुनिया के कई देशों में अशांति फैली हुई है. मिडिल ईस्ट को जंग में धकेल और भारत को टैरिफ की धमकी देने वाला अमेरिका अब एक और देश की अमन शांति को मिटाने जुट गया है. अमेरिका के बड़बोले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि नाइजीरिया में ईसाई मजहब खतरे में है. ट्रंप ने ऐलान किया कि अमेरिका ने नाइजीरिया को विदेश मंत्रालय की स्पेशल वॉच लिस्ट (Special Watch List) में शामिल किया है.
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर दावा किया कि नाइजीरिया में हजारों ईसाइयों की हत्या की जा रही है. यहां पर कट्टरपंथी ताकतें ईसाइयों का नरसंहार कर रही हैं. अब अमेरिका ने नाइजीरिया को 'विशेष चिंता वाला देश' घोषित किया है. अक्सर अपने बेतुके और सांप्रदायिक बयानों को लेकर मशहूर ट्रंप ने ग़ज़ा नरसंहार की कभी बात नहीं करते हैं, जबकि शांति और तरक्की के नये आयाम छू रहे मुस्लिम देशों को लगातार टार्गेट कर रहे हैं.
अमेरिकी प्रशासन ने नाइजीरिया को उस सूची में शामिल किया है, जिसमें पहले से चीन, रूस, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और म्यांमार जैसे देश शामिल हैं. अमेरिका और शांति का ढिंढोरा पीटने वाले यूरोपी का मुल्कों की मानें तो किसी भी देश को इस लिस्ट में तभी डाला जाता है, जब उसके यहां पर मजहबी आजादी का उल्लंघन किया जाता है. इस लिस्ट में शामिल करने का मतलब यह नहीं है कि तुरंत आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएंगे बल्कि इसके उलट अमेरिकी राष्ट्रपति को आगे चलकर सामरिक, आर्थिक या कूटनीतिक कार्रवाई करने का अधिकार मिल जाता है.
यूएस इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम एक्ट (IRFA) के तहत, किसी देश को 'विशेष चिंता वाला देश' तभी घोषित किया जाता है जब वहां मजहबी आजादी का लगातार दमन हो रहा हो या धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा हो. इस एक्ट के तहत अमेरिका ऐसे देशों पर आर्थिक या व्यापारिक प्रतिबंध लगा सकता है या राजनयिक दबाव बना सकता है. हालांकि, अंतिम फैसला राष्ट्रपति के विवेक पर निर्भर करता है.
नाइजीरिया को वॉच लिस्ट में शामिल करने के बाद अब अमेरिका वहां की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगा. ट्रंप प्रशासन इसके बाद संभावित आर्थिक प्रतिबंधों और कूटनीतिक कदमों पर विचार करेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला सिर्फ नाइजीरिया के लिए नहीं बल्कि पूरे अफ्रीका में अमेरिका की धार्मिक स्वतंत्रता नीति का हिस्सा है. ट्रंप प्रशासन इस नीति के तहत ईसाई समुदाय की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है.
ट्रंप ने हिंसा के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि वह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विशेष समिति और सांसद रिले मूर और टॉम कोल से इस मामले की जांच करने का अनुरोध कर रहे हैं. उन्होंने लिखा, "जब नाइजीरिया जैसे देश में हजारों निर्दोष लोगों की हत्या सिर्फ उनके धर्म की वजह से की जा रही है, तो दुनिया को चुप नहीं रहना चाहिए. अब ठोस कदम उठाने का समय है."
मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, हाल के सालों में नाइजीरिया में ईसाई समुदाय पर हमलों में तेजी आई है. सिर्फ पिछले साल ही 4,000 से ज्यादा ईसाई मारे गए और 2,000 से ज्यादा चर्चों को निशाना बनाया गया. इन घटनाओं के पीछे दो प्रमुख आतंकी संगठन माने जा रहे हैं बोको हराम और फुलानी चरवाहा मिलिशिया. नाइजीरिया में हिंदू और मुसलमानों की आबादी लगभग बराबर है. इन समूहों ने ग्रामीण इलाकों में कई हमले किए हैं, जिनकी वजह से हजारों लोग बेघर हो गए हैं.