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Syria में दखल न दे इजरायल; अमेरिका ने नेतन्याहू को दी नसीहत, जानें पूरा मामला

Trump Israel Syria Advice: सीरिया की ज्योग्राफी एक बार फिर वेस्ट एशिया में चर्चा का विषय बन गई है. डोनाल्ड ट्रंप ने हालात की तारीफ करते हुए इजराइल को दखल न देने की सलाह दी और बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात की, जिससे पॉलिटिकल हंगामा मच गया.

AI फोटो
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Donald Trump on Syria: पश्चिम एशिया में भूगोल अक्सर युद्धों और गठबंधनों से ज्यादा ताकतवर साबित होता है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण सीरिया है. वह देश जिसे नक्शों में 'चौराहा' कहा जाता है, और राजनीति में 'की-स्टोन'. यही वजह है कि मंगलवार को ट्रंप का बयान सुर्खियों में आ गया. 

ट्रूथ पर उन्होंने सीरिया के बदलते हालात की प्रशंसा की और साथ ही इजरायल को सलाह कि दोनों के अच्छे संबंध इलाके के लिए बेहतर होगा. इसके बाद ट्रंप ने बीबी को फोन भी किया.
उन्होंने कहा, “सीरिया में दखल मत दो, उसे अपने राजनीतिक पुनर्निर्माण का मौका दो." उनके इस बयान ने पूरे क्षेत्र में हलचल पैदा कर दी है. यह बयान सिर्फ अमेरिकी कूटनीति की बात नहीं थी. यह सीरिया के भूगोल की ताकत की खुली स्वीकारोक्ति थी.

सीरिया की स्थिति ऐसी है कि वहां होने वाली किसी भी हलचल की कंपन इजरायल से लेकर तुर्की, ईरान, रूस और अमेरिका तक पहुंचती है. यही कारण है कि ट्रंप प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों का एक बयान सुर्खियां बटोर गया. उन्होंने कहा कि 'बीबी को हर जगह भूत ही दिखाए देते हैं.' 

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इजरायल को सार्वजनिक रूप से चेताया गया कि सीरिया अब एक निर्णायक मोड़ पर है और किसी भी सैन्य हस्तक्षेप से यह नई स्थिरता बिखर सकती है. यह टिप्पणी इजरायल की सालों पुरानी नीति सीरिया और लेबनान में सक्रिय हमले के प्रत्यक्ष विरोध में मानी गई. यह वही क्षेत्र है जहां भूमिकाएं इतनी परस्पर बंधी हुई हैं कि किसी एक की कार्रवाई, दूसरे की सुरक्षा, तीसरे के गठबंधन और चौथे की अर्थनीति को प्रभावित करती है.

सीरिया का भूगोल इस पूरे संघर्ष की जड़ है. भूमध्यसागर का किनारा, इराक तक फैलती धरती, तुर्की की दक्षिणी सीमा, और इजरायल और जॉर्डन के मार्ग सभी एक ही नक्शे पर मिलते हैं. यही चौराहा इसे दुनिया की पांचों प्रमुख शक्ति-केंद्रों के ध्यान में रखता है. रूस का भूमध्यसागर में नेवल बेस टार्ट्स यही है.

ईरान का 'तेहरान-टू-मेडिटेरियन शिया कॉरिडोर' सीरिया से होकर ही संभव है. तुर्की अपनी सुरक्षा और कुर्द लड़ाकों को रोकने के लिए सीरिया पर निर्भर है और इजरायल के लिए तो गोलन हाइट्स का मोर्चा उसकी उत्तरी सुरक्षा का सीधा सवाल है.

ट्रंप और उनका प्रशासन जो कह रहा है उससे साफ है कि अमेरिका एक ऐसा सीरिया चाहता है जो उसके प्रभाव क्षेत्र में रहे, जिससे उसे रूस और ईरान के प्रसार को रोकने में मदद मिले. लेकिन साथ ही, वह यह भी समझता है कि इजरायल की लगातार सैन्य कार्रवाई सीरिया की नयी राजनीतिक संरचना को अस्थिर कर सकती है. इसी संतुलन को संभालने के लिए ट्रंप ने इजरायल को नसीहत दी कि “सीरिया में हस्तक्षेप क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान पहुंचाता है.”

सीरिया की यह रणनीतिक स्थिति उसे आर्थिक फायदे भी दे सकती है. प्रस्तावित तेल-गैस पाइपलाइनें चाहे गल्फ देशों से हों या ईरान से यूरोप तक पहुंचने के लिए सीरिया की जमीन चाहती थीं. अगर यह शांति से चल पाता, तो सीरिया ट्रांजिट-हब बन सकता था, लेकिन वर्षों से जारी युद्ध ने इन संभावनाओं को रोक दिया. फिर भी, यह संभावना आज भी दुनिया की ऊर्जा राजनीति में सीरिया को केंद्र में रखती है. तो कह सकते हैं कि सीरिया का यह चौराहा सिर्फ भूगोल नहीं, सौदेबाजी की शक्ति भी है. रूस को समुद्री रास्ता चाहिए तो सीरिया दरवाजा खोलता है, ईरान अपनी क्षेत्रीय पहुंच बढ़ाना चाहता है तो सीरिया राजनीतिक समर्थन लेता है.

अरब देश चाहते हैं कि ईरान कमजोर हो, तो वे सीरिया से निवेश और पुनर्निर्माण के रास्ते खोलें. इतनी व्यापक कूटनीति सिर्फ उन देशों के हाथ में होती है जो क्षेत्रीय नक्शे का धुरी-बिंदु होते हैं. लेकिन इस चौराहे की कीमत भी भारी रही है. आईएसआईएस का उभरना, आतंकवाद, लाखों शरणार्थियों का प्रवाह, गृहयुद्ध की त्रासदी. यही अस्थिरता आज वैश्विक ताकतों को मजबूर कर रही है कि वे सीरिया को स्थिर होते देखना चाहें और ट्रंप का बयान इसी दिशा में एक राजनीतिक संकेत है.

इनपुट-आईएएनएस

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