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मथुरा: भरतपुर के राजा मानसिंह कत्ल मामले में 35 साल बाद फैसला आया है और आज मथुरा की जिला जज ने सज़ा का ऐलान करते हुए 11 मुजरिम पुलिस अहलकारों को उम्र कैद की सज़ा सुनाई है. इसमें उस वक्त के सीओ कान सिंह भाटी और एसएचओ वीरेंद्र सिंह भी शामिल हैं.
बता दें कि गुज़िश्ता रोज़ अदालत ने इस मामले में 11 पुलिस अहलकारों के मुजरिम करार दिया था जबिक 3 पर इल्ज़ामात साबित ना होने की वजह से उन्हें बरी कर दिया गया.
याद रहे कि भरतपुर रियासत के राजा मानसिंह और दो दीगर लोगों की मौत 21 फरवरी 1985 को पुलिस से आमने-सामने की गोलीबारी में हुई थी. राजा मानसिंह की मौत के बाद उनके दामाद विजय सिंह ने पुलिस अहलकारों पर कत्ल का मुकदमा दर्ज करवाया था. जिसके बाद रियासती हुकूमत ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी.
जानकारी के मुताबिक 1985 में हुए राजस्थान असेंबली इंतेखाबात में राजा मानसिंह डीग असेंबली हलके से आज़ाद उम्मीदवार थे. कांग्रेस के उम्मीदवार ने सीएम की जनसभा का झंडा डीग मे मौजूद किले पर लगा दिया गया. ये बात राजा मानसिंह को नागवार गुज़री और उन्होंने अपने कत्ल से एक दिन पहले डीग में राजस्थान के उस वक्त के वज़ीरे आला शिवचरण माथुर के जलसे के मंच और हेलीकॉप्टर को जीप की टक्कर मार कर तबाह कर दिया था.
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