बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ साल 2018 में 62, साल 2019 में 53 और 2020 में अब तक 06 शिकायतें मिली हैं.
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नई दिल्ली: मरकज़ी वज़ारते कानून ने एक आरटीआई में यह जानकारी देते हुए बताया है कि पिछले ढाई सालों में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ हुकूमत को कुल 534 शिकायतें हासिल हुई हैं. जिनमें 122 शिकायतें सुप्रीम कोर्ट और 412 शिकायतें मुख्तलिफ हाई कोर्ट के जजों के खिलाफ थीं.
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ साल 2018 में 62, साल 2019 में 53 और 2020 में अब तक 06 शिकायतें मिली हैं. जबकि हाई कोर्ट के जजों के खिलाफ साल 2018 में 204, साल 2019 में 180 और 2020 में 28 शिकायतें मिली हैं.
सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ की गई शिकायतों में 52 शिकायतें ऑनलाइन और 70 शिकायतें ऑफलाइन भेजी गयीं. वहीं हाई कोर्ट के जजों के खिलाफ 164 शिकायतें ऑनलाइन और 248 शिकायतें ऑफलाइन भेजी गयी थीं.
गौरतलब है कि मरकज़ी हुकूमत इन शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं करती है. हुकूमद के ज़रिए इन्हें सीधे सुप्रीम कोर्ट या मुतअल्लिका हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को भेज दिया जाता है. जिसके बाद अदलिया के ज़रिए इन शिकायतों पर की गई किसी भी तरह की कार्रवाई से हिंदुस्तानी हुकूमत को आगाह नहीं कराया जाता है. जिस वजह से इन शिकायतों का निपटारा होना या किसी कोने में दबे होना हमेशा नामालूम ही रह जाता है.
क्या है आरटीआई
आरटीआई का पूरा नाम (राइट टू इनफार्मेशन, Right To Information) होता है. जिसका मतलब जानकारी का हक. यानी अगर कोई भी निवासी हिंदुस्तान की शहरियत रखता है और किसी भी मेहकमे की जानकारी हासिल करना चाहता है तो वह आरटीआई के तहत फाइल कर सकता है. इसके लिए शहरी को सरकारी इदारे में जाकर बस एक अर्ज़ी देनी होती है और अर्ज़ी देने के बाद उसका जवाब उस 30 दिनों के अंदर देना होता है.