)
कानपुर: कोरोना ने पूरी दुनिया की सांसों पर ही पहरा लगा दिया है. कोरोना के असरात से बचने के लिए हिंदुस्तान भी लॉकडाउन हो गया है. जिसके चलते लोग एक दूसरे से मिलने के लिए भी तरस रहे हैं. लेकिन कोरोना से बचने के लिए लॉकडाउन के अलावा कोई चारा नहीं है. इसी सिम्त में कानपुर से गंगा जमुनी की मिसाल की ख़बर सामने आई.
कानपुर में एक वालिद अपनी ज़िंदग़ी की आख़िरी सांसे गिन रहा था. लेकिन लॉकडाउन के चलते उस शख्स की इकलौती बेटी अपने वालिद को आखिरी पलों में देख ना सकी. और एक वालिद की अपनी बेटी का इंतेजार आंखों में संजोए इस दुनिया से अलविदा कह दिया. तब ऐसे में पड़ोसी मुस्लिम भाइयो ने उनको कंधा दिया और उनकी हिन्दू रिवाज के साथ आखिरी रसूमात कर हिन्दू मुस्लिम एकता की अनूठी मिशाल पेश की.
दरअसल कानपुर के नरोना रोड पर मौजूद कौशल प्रसाद अकेले रहते थे उनकी अहेलिया और बेटे की दो साल पहले ही मौत हो चुकी है अब उनकी सिर्फ एक ही बेटी है. कमलेश्वरी उर्फ कृष्णा जोकि शादी के बाद सीतापुर में रहती है. 60 साला कौशल प्रसाद लंबे समय से बीमार थे वे चाहते थे कि उनके आखिरी पलो में उनकी बेटी उनके पास आ जाये लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था. और उनकी मौत हो गयी.
कोरोना के इस संजीदा दौर जब हिंदु मुस्लिम की सियासत ने जोर पकड़ रखा है उस दौरान ये ख़बर लोगों के दिलों को ज़रूर जीत लेगी. और कहीं ना कहीं उन लोगों के मुंह को ज़रूर बंद कर देता है जो हर बात को मज़हब से तोलते हैं. इस संजीदा वक्त में हमें ज़रूरत है हर किसी के मदद करने की इंसानियत दिखाने की.
Watch Zee Salaam Live TV