संजय सिंह ने कहा, “सड़क खामोश हो गई तो संसद आवारा हो जाएगी; हमें इसे हर हाल में बचाना होगा”
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संजय सिंह ने कहा, “सड़क खामोश हो गई तो संसद आवारा हो जाएगी; हमें इसे हर हाल में बचाना होगा”

आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने जी सलाम पर दिए इंटरव्यू में मौजूदा सियासी सगर्मियों और किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर पूछे गए तमाम सवालों का बड़े बेबाकी के साथ जवाब दिया. उन्होंने कहा कि मोदी कहते हैं कि उनकी पार्टी किसानों को कृषि कानूनों के बारे में समझा नहीं पाई जबकि हकीकत यह है कि यह कानूना किसानों की समझ में आ गई, इसलिए इसे वापस करना पड़ा. 

 

संजय सिंह ने कहा, “सड़क खामोश हो गई तो संसद आवारा हो जाएगी; हमें इसे हर हाल में बचाना होगा”

नई दिल्लीः आम आदमी पार्टी के नेता (Aam Admi Party Leader) और राज्यसभा सांसद संजय सिंह (Rajya Sabha MP Sanjay Singh) ने केंद्र सरकार के जरिए लाए गए तीन खेती कानूनों (Farms Laws) को लेकर सारी रात-विरोध करने वाली घटना को याद करते हुए कहा कि जब ये काला कानून आया था तो उस वक्त भी मैंने विरोध किया था. आपको याद होगा कि संसद के परिसर में बैठकर हमने पूरी रात धरना दिया था. हम  निलंबित भी हुए, मार्शल से घसीटकर बाहर भी किया गया था. मैंने माइक भी तोड़ा था, जिसको लेकर मैंने कहा था कि भाई आप किसानों की हड्डियां तोड़ रहे हैं तो मैंने माइक तोड़ दिया तो कौन सा गलत काम किया. संजय सिंह ने हिंदुस्तान के प्रख्यात समाजवादी नेता हुए डॉ. राम मनोहर लोहिया (Dr. Rammanohar Lohiya) को कोट करते हुए कहा कि लोहिया जी ने कहा था कि सड़क खामोश हो गई तो संसद आवारा हो जाएगी. इस देश की संसद को आवारा होने से बचाने के लिए सड़क की आवाज को जीवित रखना पड़ेगा.

 

एक साल बात हम सच साबित हुए और प्रधानमंत्री गलत 
संजय सिंह ने कहा कि किसान क्या कह रहे थे आपसे, कि आप यह काला कानून मत बनाइए. लेकिन आपने चंद पूजीपतियों का फायदा पहुंचाने के लिए यह काला कानून इस देश में लाने का काम किया, जिसकी वजह से एक साल तक सड़क पर आंदोल चला. संजय सिंह ने कहा कि आज एक साल के बाद हम सही साबित हुए. देश के प्रधानमंत्री गलत साबित हुए. ये सरकार गलत साबित हुई. सड़क पर बैठा हुआ लाखों किसान सही साबित हुआ.

जमाखोरी और कालाबाजारी को सरकार ने लीगलाईज किया था 
जी सलाम के एडिटर ने जब संजय सिंह से पूछा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारे लोग, हमारे मिनिस्टर्स किसानों को सही से समझा नहीं पाए. कंफ्यूजन की वजह से बाकी पार्टियों ने उन्हें गुमराह किया,  इसलिए यह मसला खड़ा हुआ, तो इसके जवाब में संजय सिंह ने कहा कि मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि आपने इस बिल में लिखा क्या है? कभी पढ़ा, कभी बहस की, आपने इसमें लिखा है कि असीमित भंडारण की छूट, यानी कि जमाखोरी को, कालाबाजारी को महंगाई को आपने लीगलाईज किया.

जमाखोरी कौन करता है किसान या पूंजीपति 
संजय सिंह ने पूछा कि जमाखोरी कौन करता है? जमाखोरी कोई सामान्य किसान नहीं करता, बड़े-बड़े पूंजीपति करते हैं. आपने इसमें बड़े कोल्ड स्टोरेज बनाकर असीमित भंडारण की छूट दे दी. सस्ते में, गेहूं, चावल, दाल, सस्ते में सारे अनाज खरीदे जाएंगे और उसको बड़े-बड़े कोल्ड स्टोरेज में रखा जाएगा और जब बाजार में उस चीज की कमी हो जाएगी तो महंगे दामों पर बेचा जाएगा. इसका मतलब इस बिल ने कालाबाजारी, महंगाई और जमाखोरी तीनो को बढ़ावा देने का काम किया.

किसानों को बिल समझ आ गया था 
संजय सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी को मुखातिब करते हुए कहा कि मोदी जी को मैं कहना चाहूंगा कि समस्या यह नहीं थी कि किसानों को बिल समझ नहीं आया नहीं था बल्कि समस्या यह थी कि किसानों को बिल समझ आ गया था. आपकी नोटबंदी की तरह किसान इस बार भी धोखा खा जाता तो वो बड़े नुकसान में जाता. उन्होंने कहा कि इस कानून की वापसी का सबसे बड़ा क्रेडिट किसानों को है. 

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