पश्चिम बंगाल चुनाव में फ़ुरफ़ुरा शरीफ़ के पीरज़ादा अब्बास सिद्दीकी खुद को गेमचेंजर समझ रहे थे, लेकिन उनकी इस आरज़ू पर कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन ने तकरीबन पानी फेर दिया है.
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कोलकाता: पश्चिम बंगाल चुनाव के पेश-ए-नज़र फ़ुरफ़ुरा शरीफ़ के पीरज़ादा अब्बास सिद्दीकी ने असदुद्दीन ओवैसी को छोड़ कर कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन का दामन थामा है. कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन से अब्बास सिद्दीकी ने 70 से ज़ायद सीटों का मुतालबा किया था, लेकिन कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन ने सिद्दीकी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है.
कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन ने अब्बास की पार्टी को सिर्फ़ 26 सीटें दी हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में से 92 सीटों पर कांग्रेस चुनाव लड़ेगी, जबकि 26 सीटों पर पीरज़ादा अब्बास सिद्दीकी की पार्टी ISF चनाव लड़ेगी और बाकी सीटों पर लेफ्ट के उम्मीदवार मैदान में खड़े होंगे.
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पहले क्या था समीकरण ?
पहले ये उम्मीद जताई जा रही था कि असदुद्दीन ओवैसी और पीरज़ादा अब्बास सिद्दीकी एक साथ मैदान में उतरेंगे, इसके लिए असदुद्दीन ओवैसी ने बंगाल के पहले दौरे में पीरज़ादा से अब्बास सिद्दीकी से मुलाकात की थी. लेकिन बाद में अब्बास सिद्दीकी ने ओवैसी का साथ छोड़ कर कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन से हाथ मिला लिया.
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मुस्लिम वोटरों को अपने पाले में कर पाएंगे पीरज़ादा अब्बास सिद्दीकी ?
फ़ुरफ़ुरा शरीफ़ के पीरज़ादा अब्बास सिद्दीकी जो बंगाल में गेमचेंजर बनने की दौड़ में शामिल थे, लेकिन अब वह खुद अपने वजूद की लड़ाई लड़ते दिख रहे हैं. कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन ने पीरज़ादा को ज़्यादा सीटें न देकर उनके हाथ-पावं बांध दिए हैं. पीरज़ादा अब्बास सिद्दीकी बंगाल के जिस दरगाह से तअल्लुक़ रखते हैं, उसका बंगाल की तकरीबन 100 सीटों पर असर है. उसके अलावा पश्चिम बंगाल के मुसलानों में अब्बास सिद्दीकी का अपना फैन बेस भी है. उनके जलसों और रैलियों में बड़ी तादाद में अवाम की भीड़ जमा होती है, लेकिन क्या यह भीड़ वोटों में तब्दील हो पाएगी, ये तो वक्त ही बताएगा. शायद इसी का भरोसा पीरज़ादा अब्बास सिद्दीकी कांग्रेस और लेफ्ट गठबंधन को नहीं दिला पाए, जिसके सबब उन्हें सिर्फ़ 26 सीटों पर चुनाव लड़ने होंगे.
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ग़ौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में इस बार विधानसभा चुनाव 8 चरणों में होंगे. पहले चरण के लिए 27 मार्च को मतदान होगा, जबकि आखिरी चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को होगी और 2 मई को रिजल्ट आएगा.
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