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Delhi: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को ISIS से प्रेरित एक मॉड्यूल की जांच में बड़ा सुराग मिला है. हरियाणा के मेवात से जुड़े एक संदिग्ध हथियार सप्लायर, जमील का नाम सामने आया है, जो कल्याण (महाराष्ट्र) के रहने वाले और इस मॉड्यूल के मुख्य मुल्जिम आफताब नासिर कुरैशी से जुड़ा हुआ है. माना जा रहा है कि जमील ने ही इस कथित आतंक साजिश में हथियार उपलब्ध कराए.
स्पेशल सेल ने इस हफ्ते हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से आफताब और उसके साथी सुफियान अबूबकर खान को पकड़ा. दोनों महाराष्ट्र के कल्याण के रहने वाले हैं. पुलिस का कहना है कि दोनों दिल्ली से मुंबई लौटने की तैयारी में थे और उनके पास से 3 पिस्तौल और कई कारतूस मिले. ये हथियार कथित तौर पर मेवात से जमील के जरिए मंगाए गए थे.
अधिकारियों के मुताबिक जमील कोई विचारधारा फैलाने वाला नहीं बल्कि ‘फैसिलिटेटर’ है, यानी बिना पूछताछ के जरूरत के हिसाब से हथियार पहुंचाने वाला सप्लायर. जांच एजेंसियां अब मेवात में उसकी तलाश कर रही हैं और उसकी सप्लाई चेन को तोड़ने की कोशिश में हैं. जांच में सामने आया है कि आफताब 2020 से ऑनलाइन कट्टरपंथी सामग्री देख रहा था. शुरू में वह सिर्फ पढ़ता-सुनता था, लेकिन धीरे-धीरे उसने आतंकी गतिविधियों के लिए मदद ढूंढनी शुरू कर दी. व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर उसने ऐसे लोगों से संपर्क किया, जिनमें अशहर दानिश नाम का शख्स भी शामिल है. अशहर ने ही आफताब को जमील से मिलवाया.
जराए के मुताबिक, सितंबर की शुरुआत में आफताब ने जमील से भरोसेमंद हथियार लेने की डील फाइनल की थी. उसने अपने दोस्त सुफियान को भी साथ चलने को राजी किया. 9 सितंबर को दिल्ली में हथियार सौंपे गए. बताया जा रहा है कि दोनों को दो 32 बोर की सेमी-ऑटोमैटिक पिस्तौल और 15 जिंदा कारतूस मिले. पुलिस ने तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर उन्हें निजामुद्दीन स्टेशन पर ही रोक लिया. अब एजेंसियां हथियार डील के पैसों का भी पता लगा रही हैं कि भुगतान सीधे किया गया, हवाला के ज़रिए आया या किसी समर्थक ने कराया.
आफ़ताब दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़कर पहले मीट की दुकान और फिर गोदाम, डिलीवरी सर्विस व सिम कार्ड बेचने जैसे छोटे काम करता रहा. अधिकारियों के मुताबिक उसने अपने साथियों को भी एन्क्रिप्टेड ग्रुप्स में जोड़ने, जिहाद से जुड़े वीडियो फैलाने और उग्र विचारधारा को बढ़ावा देने में नोडल रोल निभाया. वह जाकिर नाइक, इसरार अहमद, तारिक जमील जैसे विवादित प्रचारकों के ऑनलाइन प्रवचन सुनता था. सुफियान पांचवीं के बाद पढ़ाई छोड़कर वेल्डर का काम करता था, आफताब का करीबी दोस्त था और धीरे-धीरे उसकी सोच से प्रभावित हुआ. जांचकर्ताओं का कहना है कि वह विचारधारा का नेता नहीं बल्कि आफ़ताब के असर में आकर शामिल हुआ.