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Aftab Hussain Poetry: आफ़्ताब हुसैन की पैदाइश पाकिस्तान में हुई. वह 80 की दहाई में उर्दू शाइरी में छा गए. यूनीवर्सिटी ओरीएनटल कॉलेज लाहौर से उर्दू साहित्य की तालीम हासिल की. इसके बाद वह यहीं पर असिसटेंट प्रोफ़ैसर हो गए. पाकिस्तान में मार्शल ला के बाद साल 2000 में देश छोड़ना पड़ा. इस दौरान भारत में भी रहे.
लोग किस किस तरह से ज़िंदा हैं
हमें मरने का भी सलीक़ा नहीं
कब तक साथ निभाता आख़िर
वो भी दुनिया में रहता है
खिला रहेगा किसी याद के जज़ीरे पर
ये बाग़ मैं जिसे वीरान करने वाला हूँ
मिलता है आदमी ही मुझे हर मक़ाम पर
और मैं हूँ आदमी की तलब से भरा हुआ
जो कुछ निगाह में है हक़ीक़त में वो नहीं
जो तेरे सामने है तमाशा कुछ और है
तिरे बदन के गुलिस्ताँ की याद आती है
ख़ुद अपनी ज़ात के सहरा को पार करते हुए
ये सोच कर भी तो उस से निबाह हो न सका
किसी से हो भी सका है मिरा गुज़ारा कहीं
क्या ख़बर मेरे ही सीने में पड़ी सोती हो
भागता फिरता हूँ जिस रोग-भरी रात से मैं
सो अपने हाथ से दीं भी गया है दुनिया भी
कि इक सिरे को पकड़ते तो दूसरा जाता
वो यूँ मिला था कि जैसे कभी न बिछड़ेगा
वो यूँ गया कि कभी लौट कर नहीं आया
चलो कहीं पे तअल्लुक़ की कोई शक्ल तो हो
किसी के दिल में किसी की कमी ग़नीमत है
कुछ और तरह की मुश्किल में डालने के लिए
मैं अपनी ज़िंदगी आसान करने वाला हूँ