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शैलेंद्र सिंह/बलरामपुर: कोरोना से हिंदुस्तान की जंग जारी है. इस खतरनाक वायरस से निपटने के लिए हिंदुस्तान लॉकडाउन है. लोग अपने अपने घरों में क़ैद हैं. इस मौजूद वक्त में हर कोई सोशल मीडिया, इंटरनेट , टीवी से अपना वक्त काट रहा है. लेकिन ज़रा सोचिए अगर आपको ये सब ना मिले तो घर में रहना कितना मुश्किल हो जाएगा. यूपी के बलरामपुर के एक गांव के हालात कुछ ऐसे ही हैं.
गौरतलब है कि मरकज़ी हुकूमत ने सौभाग्य मुहिम चलाई है जिस मुहिम का मकसद ही हर गांव में बिजली पहुंचाना है. लेकिन बावजूद इसके गांव में बिजली नहीं पहुंच पाई है दरअसल हम बात कर रहे हैं यूपी के बलरामपुर जिले में शंकरगढ़ विकास खण्ड के जरहाडीह में मौजूद कचरा पारा गांव की. इस गांव में करीब 15 घर हैं और 150 से 200 की आबादी है. ये गांव शंकरगढ़ विकास खण्ड मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर की दूरी पर बसा है. गांव तक पहुंचने का रास्ता भी है लेकिन गांव वाले ए़डमिनिस्ट्रेशन की अनदेखी सह रहे हैं.
बिजली नहीं होने से गांव वाले को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. यहां तक की मोबाइल चार्ज करने के लिए भी उन्हें दूसरे गांव जाना पड़ता है. कचरा पारा गांव की ख़्वातीन भी बिजली नहीं होने से काफी परेशान हैं. बच्चों को ढिबरी की रोशनी में पढ़ाई करनी पड़ती है. गांव के सरपंच का कहना है कि इस परेशानी को लेकर वो कई बार मक़ामी एमएलए आला अफसरान को बता चुके हैं लेकिन उनकी ओर से कोई कार्यवाही नहीं की गई
गौरतलब है कि सौभाग्य मुहिम के तहत मोदी हुकूमत ने मुल्क के 18000 गांवों में बिजली पहुंचाई है.लेकिन कचरा पारा गांव को सौभाग्य मुहिम भी अभी तक रोशन नहीं कर सकी है. कचरा पारा गांव आज़ादी के बाद से ही अनदेखी झेल रहा है जिसके चलते आज के वक्त में भी अंधेरे में जीवन जीने को मज़बूर हैं.
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