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हैदराबाद: दिल्ली बलास्ट के संदिग्ध डॉक्टर उमर नबी का एक कथित विडियो वायरल होने के बाद इस्लामिक जगत में खुदकश हमलो को लेकर बहस छिड़ गई है. तमाम उलेमा ने इसे हराम बताते हुए इसकी आलोचना की है. उलेमा की दलील है कि इस्लाम में आत्महत्या को हराम करार दिया गया है. कुरआन ऐसा कहता है कि खुद की जान लेने वाले शख्स को अल्लाह कभी माफ़ नहीं करेगा. इस्लाम इंसान को हर हाल में पॉजिटिव रहना और सब्र ( धैर्य ) रखने की सीख देता है. ऐसे में कोई इस्लाम के नाम पर खुदकश बॉम्बर बनने को कैसे जायज़ ठहरा सकता है? ये इस्लामिक मान्यताओं के विरुद्ध है.
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के सद्र और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने दिल्ली ब्लास्ट के मुख्य आरोपी उमर नबी के वीडियो पर तीखी प्रतिक्रिया दी है . ओवैसी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "इस्लाम में खुदकुशी सख्त हराम है. मासूम लोगों का खून बहाना सबसे बड़ा गुनाह है. सुसाइड बॉम्बिंग को 'शहादत' कहना इस्लाम की बेईज्ज़ती है. यह किसी भी तरह 'गलत समझा गया' नहीं है. यह पूरी तरह आतंकवाद है और मुल्क के कानून के खिलाफ बड़ा जुर्म है."
साथ में ओवैसी ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए आतंकी हमले को रोकने में नाकाम रहने की जिम्मेदारी लेने की बात कही है. उन्होंने कहा, "पार्लियामेंट में गृह मंत्री अमित शाह ने 'ऑपरेशन सिंदूर' और 'ऑपरेशन महादेव' का हवाला देते हुए दावा किया था कि पिछले छह महीनों में एक भी मकामी कश्मीरी नौजवान किसी भी दहशतगर्द तंजीम में शामिल नहीं हुआ है, फिर यह नया आतंकी मॉड्यूल कहां से पैदा हो गया?" ओवैसी ने कहा कि दिल्ली जैसे संवेदनशील शहर में आईईडी प्लांट करने वाला यह ग्रुप खुफिया एजेंसियों की नाक के नीचे कैसे तैयार हुआ? इसका पता न लगा पाने की जिम्मेदारी कौन लेगा?
गौरतलब है कि वायरल वीडियो में डॉक्टर उमर सुसाइड बॉम्बिंग को 'शहादत' और 'गलत समझा गया अमल' बता रहा है. लेकिन वो उसे समाज और इंसानियत के लिए गलत भी बता रहा है. ये विडियो कुछ सेकंड का है, जिसमें सिर्फ ऐसे हिस्से को हाईलाइट किया जा रहा है, जिससे इस्लाम में सुसाइड बॉम्बिंग को जायज़ करार दिया जा सके. लेकिन जितना विडियो है, उससे भी ये साबित नहीं किया जा सकता है कि आरोपी नबी सुसाइड बॉम्बिंग को इस्लाम सम्मत बता रहा हो.
फिलहाल दिल्ली ब्लास्ट को लेकर जांच जारी है. इस पूरे मामले में अल फलाह यूनिवर्सिटी की भूमिका भी संदिग्ध है, जिसकी वजह से वो भी जांच के दायरे में हैं. इस बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने यूनिवर्सिटी के फाउंडर जावेद सिद्दीकी को 13 दिन की हिरासत में लिया है.
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