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हैदराबाद : कोरोना के खिलाफ़ पूरी दुनिया खड़ी है. हर मुल्क इस खौफनाक वायरस से अपनी अपनी लड़ाई लड़ रहा है.इस परेशानी के वक्त महामारी के खिलाफ पूरी एकजुटता के साथ खड़ा है.हिंदुस्तान में कोरोना मुतास्सिरीन की तादाद बढ़कर दो हज़ार से ज्यादा हो चुकी है.कहा जा रहा है कि तबलीगी जमात के मरकज़ के प्रोग्राम में शामिल होने के बाद और अलग अलग रियासतों में लोगों के पहुंचने के बाद ये तादाद बढ़ती दिखाई दी है.बता दें कि इस मज़हबी प्रोग्राम में हज़ारों लोगों के शामिल होने की बात सामने आई थी.
निज़ामुद्दीन तबलीगी जमात वाक्ये के बाद ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन के सद्र असदुद्दीन ओवैसी का बयान सामने आया .उन्होंने मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि मीडिया में इस ख़बर को ग़लत तरीके से दिखाया जा रहा है. इनको इंसानियत से कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 का कोई मज़हब नहीं है।
Communalising our fight against COVID19 is a shameful act. #TablighiJamat incident is being exploited to blame all Muslims for COVID19. Tablighi Jamat congregation began on 13th March & the Health Ministry had said on the same day that Coronavirus is not a health emergency pic.twitter.com/BVnwaJL9yA
— AIMIM (@aimim_national) April 2, 2020
इसी सिम्त में ओवैसी ने कहा कि तबलीगी जमात के इस मामले के बाद सभी मुसलमानों पर इल्ज़ाम थोपने का बहाना मिल गया है.तबलीगी जमात में 13 मार्च को प्रोग्राम का इनेकाद किया गया था उस समय तक सेहत महकमा ने भी कोरोना को लेकर कोई इमरजेंसी लागू नहीं की थी. फिलहाल मुल्क में बहुत बड़ी आफत आई हुई है. यह वक्त हिंदु मुसलमान करने का नहीं है क्योंकि यह महामारी मज़हब नहीं देखती.
ओवैसी ने कहा कि कोरोना वायरस से तबलीगी जमात के जिन 8 लोगों की मौत हुई है, वो शहीद हुए हैं। उन्होंने कहा कि जो 8 लोग शहीद हुए हैं, उनमें से 4 लोगों का पूरा परिवार कोरोना से मुतास्सिर है। हुकूमत उन सभी को क्वारंटाइन में रख रही है. ओवैसी ने सभी मज़हब के लोगों से अपील कर रहा हूं कि सब एक होकर इस वायरस से मुकाबला करें. अपना ख़्याल रखिए अपने पड़ोसियों का ख़्याल रखिए. इस वक्त इंसानियत के मुज़ाहिरे की ज़रूरत है इसी से हमको मिलकर इस वायरस से मुकाबला करना है.
उन्होंने कहा कि COVID19 से मरने वाले लोग शहीद होते हैं। शहीदों को दफन करने के लिए कफन (कफन) या ग़ुस्ल (सफाई) की ज़रूरत नहीं होती है।कोरोना से हुई मौत के बाद लाश को घर नहीं लाना चाहिए, हॉस्पिटल में नमाज़ पढ़कर फौरन कब्रिस्तान ले जाना चाहिए ओर दफना देना चाहिए.घर लाने से बीमारी का खतरा बढ सकता है
Those who die as a result of COVID19 are martyrs. Burial of martyrs does not require kafan (shroud) or ghusl (cleansing). One must immediately offer janazah and carry out the burial with a few people. - Barrister @asadowaisi pic.twitter.com/ImgzAapr0p
— AIMIM (@aimim_national) April 2, 2020
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