)
नई दिल्लीः देवबंद में मुसलमानों के जलसे पर एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता और बड़े नेता सैयद असीम वक़ार ने बड़ा बयान दिया है. असीम वक़ार ने कहा कि देवबंद में जिस तरीके से मुसलमानों को कमजोर करने वाला बयान दिया गया है, वह निंदनीय है. इससे देश के मुसलमानों का मोरल डाउन होगा. वह हीन भावना से ग्रस्त हो जाएंगे. मुसलमानों को कमजोर और डरपोक बनाए जाने से अच्छा है कि उन्हें उनके हक के लिए लड़ना और जगरूक करना चाहिए. वकार ने कहा कि जमीयत साजिश के तहत मुसलमानों को बरगला रहा है. एक मुसलमान देश का वैसा ही नागरिक है, जैसे इस देश में रहने वाले दूसरे लोग हैं.
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में हिंदुस्तानी मुसलमानों की सबसे बड़ी तंज़ीम जमीयत उलमा-ए-हिंद का दो दिनों का इजलास शनिवार से शुरू हुआ. इस इजलास में 25 रियासतों के नुमाइंदे इस्लाम के खिलाफ झूठी तश्हीर से निपटने की तरग़ीब पर चर्चा कर रहे हैं. मुसलमानों का ये इजलास इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्यूंकि अयोध्या की बाबरी मस्जिद के बाद अब वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद, मथुरा की शाही ईदगाह, आगरा का ताजमहल, दिल्ली का क़ुतुब मीनार के साथ-साथ अजमेर दरगाह पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
इजलास की पहले दिन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के चीफ़ मौलाना महमूद मदनी अपनी स्पीच के दौरान जज़्बाती हो गए और कहा के मुल्क में नफ़रत का बाज़ार सजाया जा रहा है, हमें अपने ही मुल्क में अजनबी बना दिया गया लेकिन हम आग को आग से नहीं बुझा सकते और हमें मायूस होने की भी ज़रूरत नहीं है. मदनी ने आगे कहा कि बेइज़्ज़त होकर ख़ामोश होना कोई मुसलमानों सीखे, मुसलमानों का राह चलना मुश्किल हो गया है, हमारे सब्र का इम्तिहान लिया जा रहा है, हमें उकसाया जा रहा है लेकिन हम नफ़रत का जवाब मुहब्बत से ही देंगे.
Zee Salaam