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Al Falah University Case: देश की राजधानी दिल्ली में 10 नवंबर को हुए एक कार बम धमाके में कम से कम 13 लोग मारे गए. इस हमले के बाद अल फलाह यूनिवर्सिटी के कुछ डॉक्टरों का नाम साज़िश में आया. यहीं से अल फलाह यूनिवर्सिटी के लिए बुरे दिन शुरू हो गए. देश का जांच एजेंसिया इस यूनिवर्सिटी की जांच कर रही है. इस कड़ी में अल फलाह यूनिवर्सिटी के फाउंडर जावेद अहमद सिद्दीकी को ED ने गिरफ्तार किया था और 13 दिनों तक हिरासत में रखा था. अब साकेत कोर्ट ने जावेद अहमद सिद्दीकी को 14 दिनों की ED कस्टडी में भेज दिया है. इस मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी.
जावेद अहमद सिद्दीकी से पूछताछ के दौरान कई अहम खुलासे होने की संभावनाएं हैं. इससे पहले भी जावेद अहमद सिद्दीकी को ईडी की 13 दिनों की हिरासत में भेजा गया था. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) शीतल चौधरी प्रधान ने 20 नवंबर को जावेद अहमद सिद्दीकी को ईडी रिमांड पर भेजने का आदेश दिया था. अपने आदेश में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा था कि ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों का पालन किया है और अपराध की गंभीरता को देखते हुए सिद्दीकी को 13 दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेजा जाना चाहिए.
यूनिवर्सिटी के फाउंडर जावेद को कब किया गया था गिरफ्तार
यूनिवर्सिटी के फाउंडर जावेद को 19 नवंबर को दिल्ली में लाल किले के पास हुए आतंकी हमले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया गया था. यूनिवर्सिटी की तरफ से किए जा रहे कथित फर्जी मान्यता और भ्रामक दावों की पड़ताल में एक बड़ा खुलासा हुआ था. रिमांड नोट के मुताबिक, इस संस्था ने कथित तौर पर पिछले कई सालों में छात्रों को भ्रमित कर न सिर्फ एडमिशन लिए, बल्कि भारी भरकम रकम भी वसूली है. आईटीआर के विश्लेषण से यह भी पता चला है कि वित्तीय वर्ष 2014-15 से 2024-25 तक यूनिवर्सिटी ने करोड़ों रुपए की आय दिखाई थी.
ईडी कर रही है जांच
ईडी की जांच में सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2014-15 और 2015-16 में क्रमश: 30.89 करोड़ और 29.48 करोड़ रुपए को स्वैच्छिक योगदान यानी वॉलंटरी कंट्रीब्यूशन बताया गया था, लेकिन 2016-17 के बाद इनकम को सीधे मेन ऑब्जेक्ट या एजुकेशनल रेवेन्यू के रूप में दिखाया जाने लगा था. जांच में पता चला कि वित्तीय वर्ष 2018-19 में 24.21 करोड़ रुपए और वित्तीय वर्ष 2024-25 में 80.01 करोड़ रुपए की आय दर्ज की गई थी. कुल मिलाकर कथित तौर पर फर्जी मान्यता के नाम पर लगभग 415.10 करोड़ रुपए की रकम हासिल की गई थी.
इनपुट-आईएएनएस