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महिला नहीं कर सकती रेप लेकिन उसके खिलाफ चल सकता है सामूहिक बलात्कार का केस, जानें क्यों ?

कानून की परिभाषा में कोई महिला बलात्कार नहीं कर सकती है, फिर भी इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आरोपी महिला की याचिका खारिज करते हुए कहा कि बलात्कार की सुविधा देने वाली महिला पर 'सामूहिक बलात्कार’ का मुकदमा चलाया जा सकता है. 

अलामती तस्वीर
अलामती तस्वीर

प्रयागराजः कोई महिला किसी का बलात्कार नहीं कर सकती है, इसके बावजूद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि एक महिला बलात्कार का अपराध नहीं कर सकती है, लेकिन अगर वह इस अपराध में किसी तरह का सहयोग करती है तो उस पर भी भारतीय दंड की धारा 376डी के तहत 'सामूहिक बलात्कार’ के अपराध के लिए मुकदमा चलाया जा सकता है. 
बलात्कार के अपराध से संबंधित IPC की धारा 375 (बलात्कार) और 376 (बलात्कार के लिए सजा) के प्रावधानों पर  विस्तार से रौशनी डालते हुए, न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने एक याचिका को खारिज कर दिया कि महिला पर सामूहिक बलात्कार के अपराध के संबंध में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है. 

इन टिप्पणियों के साथ, कोर्ट ने सुनीता पांडे द्वारा दायर आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CRPC) की धारा 482 (उच्च न्यायालय की अंतर्निहित शक्तियां) के तहत दायर एक आवेदन को खारिज कर दिया, जिसने अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश, सिद्धार्थ नगर द्वारा जारी किए गए समन आदेश को चुनौती दी थी. 15 वर्षीय लड़की के कथित बलात्कार के मामले में आईपीसी की धारा 376डी (सामूहिक बलात्कार), 212 (अपराधी को शरण देना) के मामले में सजा का प्रावधान करता है. 

महिला आवेदक की याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने कहा, “एक महिला बलात्कार का अपराध नहीं कर सकती है, लेकिन अगर उसने लोगों के एक समूह के साथ बलात्कार के कृत्य को अंजाम दिया तो संशोधित प्रावधानों के मद्देनजर उस पर सामूहिक बलात्कार का मुकदमा चलाया जा सकता है."
मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, अदालत ने शुरुआत में कहा कि यह दलील कि एक महिला पर सामूहिक बलात्कार के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है, बलात्कार से संबंधित धाराओं के संशोधित प्रावधानों के लिहाज से सही नहीं है, जो बलात्कार के अपराध से संबंधित है.

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अदालत ने कहा कि हालांकि IPC की धारा 375 की अस्पष्ट भाषा से यह साफ है कि एक महिला बलात्कार नहीं कर सकती, क्योंकि धारा विशेष रूप से बताती है कि बलात्कार का कार्य केवल 'पुरुष’ द्वारा किया जा सकता है, किसी महिला द्वारा नहीं, लेकिन IPC की धारा 376डी (सामूहिक बलात्कार) के मामले में ऐसा नहीं है.

क्या है मामला ? 
गौरतलब है कि यह घटना जून 2015 में हुई थी और लड़की के पिता द्वारा जुलाई 2015 में धारा 363 (अपहरण की सजा) और 366 (अपहरण, अपहरण या महिला को उसकी शादी के लिए मजबूर करने आदि) के तहत अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था. इसमें इल्जाम है कि उसकी करीब 15 साल की बेटी को कोई बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था. पीड़िता ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत अदालत के समक्ष अपने बयान में कहा कि याचिका दायर करने वाली आरोपी महिला कथित घटना में शामिल थी. हालांकि, चार्जशीट में उसका नाम नहीं था. तत्पश्चात, पीड़िता के पिता ने याची महिला को तलब करने के लिए धारा 319 CRPC के तहत एक आवेदन दायर किया और निचली अदालत ने उक्त याचिका को स्वीकार कर लिया था. 

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