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Allahabad High Court on Maintenance Law: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भरण-पोषण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. न्यायालय ने कहा कि अगर कोई महिला बिना उचित और ठोस कारण के अपने पति और ससुराल वालों से अलग रहने का फैसला करती है, तो उसे भरण-पोषण भत्ते की हकदार नहीं माना जाएगा. इस फैसले के तहत, न्यायालय ने मेरठ फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पत्नी को मासिक भत्ता देने का निर्देश दिया गया था. यह फैसला वैवाहिक विवादों में नए कानूनी मानदंडों की ओर इशारा करता है, जहां अब न्याय का आधार सिर्फ़ रिश्ते ही नहीं, बल्कि व्यवहार भी होगा.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अगर कोई महिला बिना किसी ठोस और सही वजह के अपने पति से अलग रहती है, तो वह गुजारा भत्ता (Maintenance) की हकदार नहीं होगी. यह फैसला मेरठ के निवासी विपल अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया गया. उन्होंने पारिवारिक अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें अपनी पत्नी को हर महीने गुजारा भत्ता देने को कहा गया था. न्यायमूर्ति सुभाष चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि जब पति महिला को साथ रखने के लिए तैयार है, लेकिन महिला बिना वजह अलग रह रही है, तो ऐसी स्थिति में वो भत्ता मांगने की हकदार नहीं है.
विपल अग्रवाल के वकील रजत ऐरेन ने अदालत को बताया कि उनकी पत्नी निशा अग्रवाल बिना किसी विशेष कारण के अपने छोटे बच्चे के साथ ससुराल छोड़कर मायके चली गई थीं. वकील ने बताया कि पति ने उन्हें कई बार समझाने और वापस बुलाने की कोशिश की, लेकिन वह वापस लौटने को तैयार नहीं हुईं. इसके बाद, पत्नी ने पारिवारिक न्यायालय में सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता की मांग करते हुए याचिका दायर की. वकील ने कहा कि पत्नी के अलग रहने का कोई ठोस कारण नहीं था, फिर भी पारिवारिक न्यायालय ने अनुकंपा के आधार पर उन्हें 8000 रुपये प्रति माह भत्ता देने का आदेश दिया.
वकील के मुताबिक, यह फैसला सीआरपीसी की धारा 125(4) का उल्लंघन है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अगर पत्नी बिना किसी उचित कारण के अलग रहती है, तो वह भत्ता पाने की हकदार नहीं है. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि पारिवारिक न्यायालय का निर्णय कानून के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है. अदालत ने पारिवारिक न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि मेरठ पारिवारिक न्यायालय को इस मामले पर पुनर्विचार करना चाहिए.