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Zee SalaamZee Salaam ख़बरेंAMU छात्र मुल्ला मोहम्मद को 18 साल बाद मिला इंसाफ; तीन मुजरिमों को उम्रकैद

AMU छात्र मुल्ला मोहम्मद को 18 साल बाद मिला इंसाफ; तीन मुजरिमों को उम्रकैद

AMU Student Murder Case: 2007 में AMU छात्र संघ चुनावों के दौरान छात्र मुल्ला मोहम्मद की हत्या से जुड़े एक मामले में एक फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने 18 साल बाद तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है.

AMU छात्र मुल्ला मोहम्मद को 18 साल बाद मिला इंसाफ; तीन मुजरिमों को उम्रकैद

AMU Student Murder Case: 2007 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन के चुनावों के दौरान एक छात्र की हत्या कर दी गई थी. इस हत्या के मामले में कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है. एडिशनल सेशंस जज फास्ट ट्रैक कोर्ट II, तारकेश्वरी सिंह ने तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई. कोर्ट ने हर दोषी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया.

दरअसल, 8 अप्रैल 2007 की रात को ओडिशा के रहने वाले AMU के छात्र मुल्ला मोहम्मद की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. यह घटना तब हुई जब मुल्ला मोहम्मद यूनिवर्सिटी कैंपस में हबीब हॉल के सामने एक चाय की दुकान पर चाय पी रहे थे. अचानक हुई फायरिंग में उनकी मौके पर ही मौत हो गई. इस हत्याकांड ने AMU कैंपस और अलीगढ़ शहर को हिलाकर रख दिया था.

जांच में पता चला कि यह हत्या छात्र संघ चुनावों से जुड़ी दुश्मनी का नतीजा थी. उस समय AMU में छात्र राजनीति अपने चरम पर थी और अलग-अलग गुटों के बीच तनाव था. मुल्ला मोहम्मद की हत्या के बाद यूनिवर्सिटी कैंपस में भारी तनाव फैल गया और कई दिनों तक माहौल बहुत तनावपूर्ण बना रहा. ट्रायल के दौरान सरकारी वकील कुलदीप कुमार तोमर ने कोर्ट को बताया कि अभियोजन पक्ष ने मजबूत सबूत और चश्मदीदों की गवाहियां पेश कीं. गवाहों की गवाही, मेडिकल रिपोर्ट, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और दूसरे सबूतों के आधार पर, कोर्ट इस नतीजे पर पहुंचा कि आरोपियों ने सोच-समझकर यह अपराध किया था.

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कोर्ट ने नवी आबिद अंसारी, गीतम और इमरान को हत्या का दोषी ठहराया. अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि यह एक गंभीर और जघन्य अपराध था जिसने न केवल एक होनहार छात्र की जान ली, बल्कि शैक्षणिक कैंपस की शांति और सुरक्षा पर भी गहरा असर डाला. इसलिए दोषियों को कड़ी सजा देना जरूरी था. यह घटना सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन इलाके में हुई थी. लंबी जांच के बाद, पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी. सालों तक सुनवाई और गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद अब इस मामले में अंतिम फैसला सुनाया गया है.

 

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Tauseef Alam

तौसीफ आलम पिछले चार सालों से पत्रकारिता के पेशे में हैं. उन्होंने देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जामिया मिल्लिया इस्लामिया से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है. Amar Ujala,Times Now...और पढ़ें

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