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Gadaria Community on Assam Bulldozer Action: असम में कथित अवैध कब्जों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन जारी है. राज्य के कई इलाकों में रहने वाले मुसलमानों के घरों को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया है. अब असम सरकार ने इंडीजीनस मुस्लिम गडरिया समुदाय के 200 से ज़्यादा घरों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी कर ली है. प्रशासन ने 200 परिवारों को बेदखली का नोटिस भेजा है. इस नोटिस के बाद गडरिया समुदाय में आक्रोश का माहौल है.
असम के गोरिया जातीय परिषद ने इल्जाम लगाया है कि राज्य सरकार के बुलडोजर अभियान की चपेट में उनके समुदाय के घर भी आ रहे हैं. परिषद के प्रमुख महासचिव एडवोकेट मीर आरिफ इकबाल हुसैन ने साफ कहा है कि सरकार की घोषणा और जमीनी हकीकत में बड़ा फर्क है. गोरिया जातीय परिषद का कहना है कि गोलाघाट जिले में 84 घर और लखीमपुर जिले में 16 घर पहले ही तोड़े जा चुके हैं.
वहीं, गुवाहाटी समेत कई इलाकों में करीब 200 से ज्यादा गोरिया परिवारों को बेदखली का नोटिस भेजा गया है. परिषद का इल्जाम है कि सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने सार्वजनिक तौर पर यह आश्वासन दिया था कि इंडीजीनस मुसलमानों, जिसमें गोरिया, मोरिया और देसी को किसी भी तरह के बुलडोजर एक्शन का सामना नहीं करना पड़ेगा लेकिन अब नोटिस मिलने और घर टूटने से समुदाय में गहरी बेचैनी है.
इस मामले को लेकर मीर आरिफ इकबाल हुसैन ने कहा, "सीएम ने वादा किया था कि इंडीजीनस मुसलमानों के घर नहीं टूटेंगे, लेकिन आज हकीकत यह है कि गोरिया परिवारों के घरों तक नोटिस पहुंच चुका है और कई घर तोड़े भी जा चुके हैं. गुवाहाटी के अलग-अलग हिस्सों में लगभग 200 परिवार आज इस डर में जी रहे हैं कि कब उनका आशियाना उजाड़ दिया जाए."
गडरिया समुदाय के लोगों ने की ये बड़ी मांग
उन्होंने कहा कि बुलडोजर कार्रवाई से समुदाय में असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है. परिषद ने असम सरकार से तीन बड़ी मांगें रखी हैं. पहली मांग गोरिया, मोरिया और देसी मुसलमानों के घरों से बुलडोजर कार्रवाई फौरन रोकी जाए. दूसरी मांग यह है कि जिन परिवारों के घर पहले ही तोड़े जा चुके हैं, उनके लिए सरकार वैकल्पिक आवास की व्यवस्था करे. जबकि तीसरी मांग यह है कि गुवाहाटी और अन्य जिलों में जो नोटिस दिए गए हैं, उन्हें तत्काल रद्द किया जाए.
सिर्फ मुसलमानों के घर पर चल रहा है बुलडोजर
गोरिया जातीय परिषद ने इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस भी किया और सीएम से अपील की कि वे समुदाय की रक्षा करें. परिषद का कहना है कि यह केवल घर टूटने का मामला नहीं है, बल्कि यह उनके सामाजिक और सांस्कृतिक अस्तित्व से भी जुड़ा है. वहीं, असम में लंबे वक्त से अवैध कब्ज़ों को हटाने के नाम पर बुलडोजर अभियान चल रहा है. सरकार का कहना है कि यह अभियान सिर्फ़ अवैध रूप से बसे लोगों के खिलाफ है, लेकिन अब जब इंडीजीनस मुस्लिम परिवार भी इसकी चपेट में आने लगे हैं तो विवाद गहराता जा रहा है.
रिपोर्ट: शरीफ उद्दीन अहमद, गुवाहाटी