असम कैबिनेट ने मदरसों और संस्कृत स्कूलों को बंद करने के प्रस्ताव को दी मंजूरी

सरकार ने फरवरी 2020 में सरकार ने था कि राज्य सरकार के तहत आने वाले मदरसों और संस्कृत स्कूलों बंद किया जाएगा. जिस पर कुछ मुस्लिम नेताओं में नाराजगी देखी गई थी.

असम कैबिनेट ने मदरसों और संस्कृत स्कूलों को बंद करने के प्रस्ताव को दी मंजूरी
फाइल फोटो

नई दिल्ली: असर सरकार की कैबिनेट ने रविवार को राज्य सरकार के द्वारा चलाए जा रहे मदरसों और संस्कृत स्कूलों को बंद करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दी है. जानकारी के मुताबिक संसदीय कार्य मंत्री चंद्र मोहन पटवारी ने एक बयान जारी कर कहा कि विधानसभा के आगामी सत्र के दौरान इस संबंध में एक बिल पेश किया जाएगा. उन्होंने आगे कहा कि मदरसों और संस्कृत स्कूलों से संबंधित मौजूदा कानूनों को निरस्त किया जाएगा.

जनता का पैसा धार्मिक शिक्षा पर नहीं होगा खर्च
हेमंत बिस्वा शर्मा ने कहा था कि राज्य सरकार के तहत आने वाले सभी मदरसे बंद किए जाएंगे. सरकार ने दलील दी थी कि जनता के पैसों का इस्तेमाल धार्मिक शिक्षा पर नहीं किया जा सकता. उन्होंने आगे कहा कि किसी भी धार्मिक शिक्षा वाले संस्थान को सरकारी फंड से नहीं चलाया जाएगा. हालांकि प्राइवेट मदरसों के बारे में हम कुछ नहीं कह सकते लेकिन सरकार के तहत आने वाले मदरसों के लिए हम नोटिफिकेशन जारी करने जा रहे हैं.

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मदरसा यूनियन ने जताया था विरोध
सरकार ने फरवरी 2020 में सरकार ने था कि राज्य सरकार के तहत आने वाले मदरसों और संस्कृत स्कूलों बंद किया जाएगा. जिस पर कुछ मुस्लिम नेताओं में नाराजगी देखी गई थी. असम के मदरसा स्टूडेंट्स यूनियन के नेता ने कहा था कि अगर हमारे मदरसों को सरकारी फंड रोका गया तो हम खामोश नहीं बैठेंगे, इसके लिए हम शांतिपूर्ण तरीके से लड़ाई लड़ेंगे. इसके अलावा मुस्लिम नेता मनीरुद्दी भुइया ने कहा है कि यह एक सियासी साज़िश है. अगर कोई समुदाय सराकारी खर्च से धार्मिक शिक्षा हासिल कर रहा है तो इसमें गलत क्या है.

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बता दें कि सूबे में सरकार के तहत 614 मदरसे आते हैं. वहीं 900 के करीब प्राइवेट मदरसे हैं. संस्कृत स्कूलों की बात करें तो लगभग 100 संस्कृत स्कूल सरकार के तहत आते हैं और करीब 500 संस्कृत स्कूल निजी तौर पर चलाए जा रहे हैं. 

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