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नई दिल्लीः असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Assam CM Hemant Biswa Sarma) ने मुस्लिमों के छोटे बच्चों के लिए मदरसा की तालीम (Madarsa Education) की मुखालफत करते हुए इतवार को कहा कि किसी भी मजहबी तालीमी इदारे में दाखिला उस उम्र में होना चाहिए जिसमें शख्स अपने फैसले खुद ले सके. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े साप्ताहिक ‘पांचजन्य’ और ‘ऑर्गेनाइजर’ के एक मीडिया सम्मेलन में सरमा ने कहा कि बच्चे मदरसे में जाने के लिए तैयार नहीं होंगे, यदि उन्हें बताया जाए कि वे वहां पढ़ने के बाद डॉक्टर या इंजीनियर नहीं बन पाएंगे. उन्होंने दावा किया कि बच्चों को ऐसे धार्मिक स्कूलों में दाखिला देना मानवाधिकारों का उल्लंघन है.
वहीं, सरमा ने कहा कि असम में 36 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है, जो तीन श्रेणियों में विभाजित (Three Categories of Muslims) है, स्वदेशी मुस्लिम, जिनकी संस्कृति हमारे समान है, धर्मांतरित मुसलमान, हम उन्हें देसी मुस्लिम कहते हैं, उनके घर के आंगन में अभी भी तुलसी का पौधा होता है और तीसरा श्रेणी विस्थापित मुसलमानों की है जो खुद को मिया मुसलमान बताते हैं.’’
मदरसा शब्द ही नहीं होना चाहिए
सरमा ने कहा कि मदरसा, शब्द ही नहीं होना चाहिए. जब तक यह मदरसा दिमाग में रहेगा, बच्चे कभी डॉक्टर या इंजीनियर नहीं बन सकते. कार्यक्रम के बाद, सरमा ने अपनी टिप्पणी के बारे में समझाते हुए कहा कि मदरसों में शिक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए कि वे छात्रों को भविष्य में कुछ भी करने का विकल्प दे सकें. सरमा ने बाद में ट्वीट किया, ‘‘मैं हमेशा वहां मदरसों के नहीं होने की वकालत करता हूं जहां औपचारिक शिक्षा पर धार्मिक झुकाव को ज्यादा तरजीह दी जाती है. प्रत्येक बच्चे को विज्ञान, गणित और आधुनिक शिक्षा के अन्य विषयों के ज्ञान से अवगत कराया जाएगा. सरमा ने कार्यक्रम में कहा कि हर बच्चा औपचारिक शिक्षा पाने का हकदार है.
स्कूल में बच्चा विज्ञान और गणित पढ़ाए जाने का हकदार
भाजपा ने कहा कि आप चाहें तो घर पर घंटों कुरान पढ़ाएं, लेकिन स्कूल में बच्चा विज्ञान और गणित पढ़ाए जाने का हकदार है. हर बच्चे को विज्ञान, गणित और आधुनिक शिक्षा के अन्य विषयों के इल्म से रौशन कराया जाएगा. सरमा ने यह टिप्पणी इस सवाल का जवाब देते हुए की कि मदरसों को शिक्षा प्रदान करने के लिए बेहतर कैसे बनाया जा सकता है, ताकि वहां से ज्यादा पेशेवर निकल सकें. जब यह कहा गया कि मदरसों में जाने वाले छात्र प्रतिभाशाली होते हैं क्योंकि वे मौखिक रूप से कुरान याद करते हैं, तो सरमा ने कहा, ‘‘अगर मदरसा जाने वाला बच्चा मेधावी है, तो यह उसकी हिंदू विरासत के कारण है. एक वक्त में सभी मुसलमान हिंदू थे.’’
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