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नई दिल्ली: पिछले 30 साल से 'बाबा का ढाबा' चला रहे हैं 80 साल के कांता प्रसाद और 70 साल की बदामी देवी रातों रात सुर्खियों की ज़ीनत बन गए थे. जिसके बाद एक तरफ जहां लॉकडाउन में उनके ढाबे पर कस्टमर नहीं आ रहे थे वहीं 'बाबा का ढाबा' पर ग्राहकों की लाइन लगती है. ऐसे में लोग उनकी निजी ज़िंदगी के बारे में जानना चाह रहे हैं. ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे सोशल मीडिया पेज ने कांता प्रसाद और बदामी देवी की कहानी सबसे साथ साझा की है. जहां से हम आपको उनकी ज़ाती ज़िंदगी की कुछ अहम बाते बताएंगे.
कांता प्रसाद ने कहा कि जब बेटी पैदा हुई, तब हम आजमगढ़ से दिल्ली आ गए. शुरुआत में सब्जियां बेची और परिवार को पाला. हमने साल 1990 में 'बाबा का ढाबा' शुरू किया. बदामी सब्जियां काटती और मैं बनाता हूं.
कांता प्रसाद ने अपने शादी कहानी बताते हुए कहा कि उन्हें सिर्फ कुछ झलकियां याद हैं. उनकी शादी महज 5 साल की उम्र में हो गई थी और तब बदामी सिर्फ 3 साल की थी. उन्होंने बताया, 'हमें नए कपड़े पहनाए गए और सारी रस्में हुईं. हमारे लिए तो ये सब पिकनिक जैसा था.
उन्होंने बताया कि हमें शादी के बारे में पता ही नहीं था. हम साल में एक बार दोस्तों की तरह मिलते थे. जब हम बड़े हुए तब हमारे रिश्ते के बारे में हमें पता चला. मैं 21 साल का हुआ, तब बदामी हमारे साथ रहने आई और हमारी दोस्ती मोहब्बत में बदल गई और तब से हम एक साथ ही जीते रहे.'
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