बदरुद्दीन अजमल से खास बातचीत: किसी भी तरह BJP को हराना है, हम CAA को पहले ही नकार चुके हैं

राज्य में भाजपा को शिकस्त देने के लिए बदरुद्दीन अजमल ने कमर कस ली है. हालांकि वो इस काम में कितना कामयाब होंगे यह तो समय आने पर ही पता चलेगा.

बदरुद्दीन अजमल से खास बातचीत: किसी भी तरह BJP को हराना है, हम CAA को पहले ही नकार चुके हैं
फाइल फोटो

ग्वाहाटी: असम में 27 मार्च से तीन चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं. इसके लिए सभी पार्टियों ने जोर-शोर से तैयारियां कर दी हैं. इस दौरान AIUDF ने जी मीडिया से खास बात चीत और अपनी पार्टी की रणनीति के बारे में बताया. उन्होंने बताया कि हमारा मकसद सिर्फ भाजपा को राज्य में शिकस्त देना है. 

असम की धुबरी सीट से लोकसभा सांसद बदरुद्दीन अजमल ने कहा,"हमारी रणनीति सिर्फ वन प्वाइंट है. हमारे गठबंधन की सातों पार्टियां का मकसद किसी भी तरीके से बीजेपी को हराना है और उनको (बीजेपी) मिनिस्ट्री से ऑउट करना व अपनी मिनिस्ट्री बनाना.यह भी पढ़ें:

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इसके अलावा उन्होंने शहरियत तरमीमी कानून (CAA) को लेकर कहा," हम CAA को हम पहले ही रिजेक्ट कर चुके हैं. अमस की जनता ने इस कानून को अब तक नहीं कुबूल किया है. केंद्र सरकार इसको उसको थोपना चाहती है लेकिन हमने इस कानून को ना पहले माना है और ना ही आज मान रहे हैं. CAA को हमेशा के लिए खत्म कर देंगे. 

"भाजपा को हराने के लिए कुर्बानी देने को तैयार"
बता दें कि राज्य में भाजपा को शिकस्त देने के लिए बदरुद्दीन अजमल ने कमर कस ली है. हालांकि वो इस काम में कितना कामयाब होंगे यह तो समय आने पर ही पता चलेगा. इससे पहले भी उन्होंने एक बयान जारी कर भाजपा के लिए मुसीबत खड़ी कर दी. उन्होंने कहा कि भाजपा को हराने के लिए हम कुर्बानी (सीटों की) तक देने के लिए तैयार हैं. इसका मतलब है कि AIUDF और कांग्रेस के दरमियान सीटों के लेकर नाराज़गी का कोई सवाल ही नहीं उठता. इससे पहले तक राज्य मुस्लिम वोट दो हिस्सों बंटते थे. पहला कांग्रेस और दूसरा AIUDF लेकिन इस बार दोनों के हाथ मिला लेने से भाजपा की मुश्किलें बढ़ना लाज़मी है. 

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मोदी लहर में भी बदरुद्दीन ने दिखाया अपना दम
बता दें कि राज्य की कुल आबाद में करीब 36 फीसद मुस्लिमों की आबादी है. जिनका 33 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जिन पर मुस्लिम वोटर्स का सीधा प्रभाव पड़ता है. बदरुद्दीन इन्हीं वोटर्स को लुभाने में लगे हुए हैं. मौलाना बदरुद्दीन की असम खासी पैठ है. उनकी पार्टी ने साल 2014 में हुए लोकसभा चुनावों में भी तीन सीटों पर जीत हासिल की थी. जबकि पूरे देश में मोदी लहर देखने को मिली थी. 

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इस तरह बनाई असम में अपनी पैठ
बदरुद्दीन अजमल साल 2005 में अपनी पार्टी असम यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AUDF) की स्थापना की थी और अगले ही साल होने वाले चुनावों में उन्होंने 10 सीटों पर जीत हासिल की थी. इसके बाद AUDF का नाम बदलकर AIUDF (ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट) कर दिया गया. इसके बाद साल 2011 में हुए विधानसभा चुनावों में AIUDF ने पिछली बार से 8 सीटें ज्यादा जीतीं. यानी इस बार AIUDF ने 18 सीटों पर जीत हासिल की. हालांकि अगली बार साल 2016 में हुए चुनावों में उन्हें 13 सीटों पर ही संतुष्ट होना पड़ा था. महज़ कुछ ही वर्षों में बदरुद्दीन अजमल ने राज्य में अपनी पैठ जमा ली.

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इन तारीखों को होंगे असम में चुनाव
इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) के मुताबिक असम में तीन चरणों में मतदान होगा. जिसके पहले चरण में 47 सीटों पर 29 मार्च को, दूसरे चरण में 39 सीटों पर 1 अप्रैल और तीसरे चरण में 40 सीटों पर 6 अप्रैल को वोटिंग होगी. असम विधानसभा में कुल 126 सीटें हैं. 

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