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Zee SalaamZee Salaam ख़बरेंSuicide Bomber:फिदायीन हमले में हराम मौत को आतंकवादी क्यों देते हैं शहादत का नाम?

Suicide Bomber:फिदायीन हमले में हराम मौत को आतंकवादी क्यों देते हैं शहादत का नाम?

Fidayeen or Suicide Attacks Are Haram: बीते साल देश की राजधानी दिल्ली में हुए एक कथित आत्मघाती हमले के बाद अब पड़ोसी मुल्क की राजधानी इस्लामाबाद में शिया इमाम बारगाह पर आतंकियों ने आत्मघाती हमला किया. इसके बाद 'फिदायीन' हमलों को लेकर बहस तेज हो गई है. इस्लामी विद्वानों ने कुरान और हदीस के हवाले से बताया कि आत्महत्या और बेगुनाहों की हत्या इस्लाम में हराम है, जबकि 'फिदायीन' शब्द का धार्मिक अर्थ अलग बताया गया है.

 

'आत्मघाती' या 'फिदायीन' हमलों पर इस्लामिक एक्सपर्ट की राय (फाइल फाटो)
'आत्मघाती' या 'फिदायीन' हमलों पर इस्लामिक एक्सपर्ट की राय (फाइल फाटो)

Fidayeen Attack in Islam: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुक्रवार (6 फरवरी) को शिया इमाम बारगाह खदीजत-उल-कुबरा में एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया. इस हमले में जुमे की नमाज अदा कर रहे कई लोगों की मौत हो गई, जबकि सैकड़ों लोग घायल हो गए. यह पहली बार नहीं, जब पाकिस्तान में किसी ने आत्मघाती हमला कर खुद को उड़ा लिया हो. इससे पहले 31 जनवरी को बलूचिस्तान में BLA से जुड़ी आसिफा मेंगल (23) और हवा बलोच (24) ने पाकिस्तानी फौज और आईएसआई के हेडक्वार्टर पर आत्मघाती हमला किया था. 

दो नौजवान लड़कियों आसिफा मेंगल और हवा बलोच के जरिये किए गए हमले को BLA ने 'फिदायीन' हमला करार दिया. BLA और पाकिस्तान के आतंकी संगठन लगातार 'फिदायीन' हमले को इस्लाम से जोड़कर पेश करते रहे हैं. देश की राजधानी दिल्ली में भी बीते साल 10 दिसंबर 2025 को डाक्टर उमर उन नबी नाम के शख्स ने विस्फोटक लदी कार के जरिये आत्मघाती हमला किया था. इस हमले में 12 से 15 बेगुनाहों की मौत हो गई थी. 

इस तरह की घटनाओं के बाद जारी बयानों में धर्म, कुर्बानी और जिहाद जैसे शब्दों का जमकर इस्तेमाल होता है. लेकिन जब इन दावों को इस्लाम और कुरान की मूल शिक्षाओं के आईने में देखा जाता है, तो कई गंभीर सवाल खड़े हो जाते हैं. 'फिदायीन' शब्द पर बात करने से पहले 'फीदिया' शब्द को भी जानना जरुरी है, क्योंकि 'फिदायीन' और 'फिदिया' शब्द एक दूसरे से मिलते हैं और इसको लेकर भ्रम न पैदा है, इसलिए दोनों पर चर्चा जरुरी है.

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'फिदायीन' से मिलता जुलता शब्द है 'फिदिया'
इस्लामी परंपरा में फीदिया एक जानी-पहचानी और स्पष्ट अवधारणा है. कुरान के मुताबिक, जो शख्स बीमारी, बुजुर्गी या मजबूरी की वजह से रोजा नहीं रख सकता, वह उसके बदले किसी जरूरतमंद को खाना खिलाता है. कुरान की सूरह अल-बकरा (2:184) में इसका जिक्र मिलता है. इस व्यवस्था का मकसद समाज के कमजोर वर्ग की मदद करना है. फिदिया का रिश्ता जिंदगी बचाने, भूख मिटाने और इंसानी रहमदिली और प्रेम से है, न कि हिंसा या मौत से. अब बात करते हैं 'फिदायीन' की.

क्या है 'फिदायीन' शब्द का मतलब?
इसके उलट, 'फिदायीन' शब्द को आज आतंकवादी संगठनों ने आत्मघाती हमलों के साथ जोड़ दिया है. अरबी भाषा में 'फिदा' का अर्थ कुर्बानी होता है, लेकिन धार्मिक विद्वानों के मुताबिक, इस्लाम में कुर्बानी का मतलब कभी भी खुद को मार लेना या बेगुनाहों की जान लेना नहीं रहा है. इस्लाम के जानकार और उलेमा की मानें तो इस शब्द का इस्तेमाल जान-बूझकर इस तरह किया गया ताकि हिंसा को धार्मिक जामा पहनाया जा सके और नौजवानों को भावनात्मक रूप से गुमराह किया जा सके.

इस्लाम में 'फिदायनी' शब्द को लेकर अक्सर आतंकी और दक्षिणपंथी संगठन भ्रम फैलाते रहे हैं, खासकर जब इसे आधुनिक दौर में आत्मघाती हमलों या आतंकवादी घटनाओं से जोड़ा जाता है. लेकिन धार्मिक ग्रंथों और इस्लामी शिक्षाओं को देखें तो तस्वीर कुछ अलग ही नजर आती है. इस्लाम में जानबूझकर खुद की जान लेने को लेकर स्पष्ट और सख्त निर्देश मौजूद हैं, जिनका जिक्र कुरान और हदीस दोनों में मिलता है.

कुरान की सूरह अन-निसा (4:29) में साफ तौर पर कहा गया है कि "अपने आप को मत मारो, बेशक अल्लाह तुम पर बड़ा मेहरबान है." इस आयत को इस्लामी जानकार आत्महत्या की मनाही के रूप में समझाते हैं. यानी इस्लामी शिक्षाओं के मुताबिक खुदकुशी या जानबूझकर अपनी जान लेना हराम माना गया है. हदीसों में भी इस पर सख्त चेतावनी दी गई है. सहीह बुखारी और सहीह मुस्लिम की हदीसों के मुताबिक, जो शख्स खुद को किसी हथियार या जहर से मारता है, उसे आखिरत में उसी तरह की सजा भुगतनी होगी. इन संदर्भों को अक्सर इस बात के प्रमाण के तौर पर पेश किया जाता है कि इस्लाम आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुंचाने की इजाजत नहीं देता.

जहां तक 'फिदाई' या 'फिदायीन' शब्द का सवाल है, इसका मूल अरबी अर्थ किसी मकसद के लिए त्याग या कुर्बानी देने वाले शख्स से जुड़ा है. ऐतिहासिक तौर पर इस शब्द का इस्तेमाल आत्मघाती हमलों के अर्थ में नहीं किया गया. 'फिदायीन' हमले में न सिर्फ एक शख्स खुद की जिंदगी खरते में डालता है, साथ कई बेगुनाहों को मौत के घाट उतार देता है. इस संबंध में कुरान की सूरह अल-माइदा (5:32) में कहा गया है कि एक बेगुनाह इंसान की हत्या करना, पूरी इंसानियत की हत्या के बराबर है.

आत्महत्या या 'फिदायीन' हमले पर एक्सपर्ट ने क्या कहा?
इस्लामिक मामलों के जानकार दिल्ली यूनिवर्सिटी में रिसर्च स्कॉलर मंजीत चौधरी ने कहा कि आधुनिक समय में कुछ उग्रवादी संगठनों ने इस शब्द को आत्मघाती हमलों के साथ जोड़ दिया, जिससे इसके धार्मिक अर्थ को लेकर भ्रम पैदा हुआ.  उनका का मानना है कि आत्मघाती हमले इस्लामी सिद्धांतों के खिलाफ हैं, क्योंकि इस्लाम जीवन की सुरक्षा और मानव जीवन की अहमियत पर जोर देता है. मंजीत चौधरी ने कहा कि इसी वजह से 'फिदायनी' शब्द के धार्मिक और आधुनिक सियासी मायनों को अलग-अलग समझना जरूरी माना जाता है. पाकिस्तान और दूसरे मुल्कों में इस तरह की वारदात को अंजाम देने वाले आतंकी इस्लाम की मूल शिक्षाओं को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं.

वहीं, सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी में इस्लामिक मामलों के रिसर्च स्कॉलर मौलाना सऊद अख्तर ने पाकिस्तान में हालिया घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए 'फिदायीन' हमले को मानवता की हत्या करार दिया. उन्होंने कहा कि कुरान और हदीस दोनों में आत्महत्या को सख्ती से मना किया गया है. हदीसों में आत्महत्या को हराम बताया गया है और इसके लिए सजा का जिक्र मिलता है. मौलाना सऊद अख्तर ने कहा कि खुद को विस्फोट से उड़ा देना किसी भी सूरत में 'शहादत' नहीं कहा जा सकता है.

इस्लामिक मामलों के जानकार और सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी के रिसर्च स्कॉलर मौलाना सऊद अख्तर ने शरीयत के नजरिए से इस विषय को आसान और साफ शब्दों में समझाया है. उनका कहना है कि इस्लामी शरीयत ने ऐसे कामों को न सिर्फ हतोत्साहित किया है, बल्कि इस पर सख्त चेतावनी दी है और इसे हराम व बड़े गुनाहों में शामिल किया है.

'अपने आप को मत मारो, बेशक अल्लाह तुम पर बहुत मेहरबान है'
मौलाना सऊद अख्तर ने कुरान की आयत का हवाला देते हुए कहा कि अल्लाह तआला फरमाता है, "अपने हाथों से खुद को हलाकत (विनाश)में मत डालो." (सूरह अल-बकरा: 195). उन्होंने बताया कि इस आयत में हर उस काम से रोका गया है जिससे इंसान की जान को खतरा हो या ऐसा कदम उठाया जाए जिससे अपनी जिंदगी खत्म होने का अंदेशा हो. उन्होंने कुरान की एक और आयत का जिक्र करते हुए कहा, "अपने आप को मत मारो, बेशक अल्लाह तुम पर बहुत मेहरबान है." (सूरह अन-निसा: 29). मौलाना के मुताबिक इन आयतों में खुदकुशी जैसे गंभीर काम से साफ तौर पर मना किया गया है.

मौलाना सऊद अख्तर ने आगे बताया कि जान, माल, इज्जत और सम्मान की हिफाजत के लिए पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने एक अहम उसूल दिया. उन्होंने हदीस का हवाला देते हुए कहा कि "इस्लाम में न खुद को नुकसान पहुंचाना है और न किसी दूसरे को नुकसान पहुंचाना है." (ला ज़रर वला ज़िरार फिल इस्लाम) यानी इस्लाम इंसान को खुद अपनी जान को खतरे में डालने या दूसरों को नुकसान पहुंचाने की इजाजत नहीं देता. उन्होंने यह भी कहा कि इस्लामी शिक्षाओं में ऐसे काम को बेहद गंभीर माना गया है. हदीसों में जिक्र मिलता है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने ऐसे शख्स की नमाज-ए-जनाजा नहीं पढ़ाई, जिसने खुद को नुकसान पहुंचाया और आत्महत्या की थी.

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Raihan Shahid

रैहान शाहिद का ताल्लुक उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर ज़िले से हैं. वह पिछले पांच सालों से दिल्ली में सक्रिय रूप से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं. Zee न्यूज़ से पहले उन्होंने ABP न्यूज़ और दू...और पढ़ें

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