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Bangladesh News: बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के खिलाफ राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन के बाद अवामी लीग को सत्ता से बाहर होना पड़ा था. उसी तर्ज पर मोहम्मद यूनुस के खिलाफ भी प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. मोहम्मद यूनुस पर इल्जाम लग रहे हैं कि वह बांग्लादेश के सुरक्षा बलों का इस्तेमाल वहां के नागरिकों का दमन करने और उनके खिलाफ हो रहे प्रोटेस्ट को कुचलने के लिए कर रहे हैं.
दरअसल, बीते बुधवार को अवामी लीग के कार्यकर्ताओं और नेशनल सिटिजन पार्टी के (NCP) सदस्यों के बीच झड़प हो गई. पिछले साल शेख हसीना के खिलाफ प्रोटेस्ट करते हुए, जिन स्टूडेंट्स की मौत हो गई थी, उनके सालगिरा के याद में NCP से जुड़े छात्रों ने बांग्लादेश के गोपालगंगज में एक रैली का आयोजन किया था. वहीं, अवामी लीग इस रैली को रोकने की कोशिश की. इन सब के बीच दोनों पक्षों में झड़प होने के बाद सुरक्षा बलों को बल प्रयोग करना पड़ा. मामला बिगड़ता देख इलाके में कर्फ्यू नाफ़िज़ कर दी गई है. इस हिंसा में 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 50 अन्य लोग घायल हैं.
वहीं, अवामी लीग ने एक बनयान जारी करके मोहम्मद यूनुस पर गंभीर इल्जाम लगा रही है. उनका कहना है कि मोहम्मद यूनुस निहत्थे नागरिकों पर हिंसक कार्रवाई कर रहे हैं. अवामी लीग के नेताओं ने इस घटना की निंदा की है. बीते बुधवार को हजारों की संख्या में लोग गोपालगंज की सड़कों पर उतरे, जहां उन्होंने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के जरिए किए जा रहे दमन के खिलाफ प्रदर्शन किया. अवामी लीग ने इल्जाम लगाते हुए कहा कि यूनुस समर्थित NCP का समर्थन न करने पर, आम लोगों को निशाना बनया जा रहा है.
गोपालगंज के डिप्टी कमिश्नर (डीसी) मोहम्मद कमरुज्जमां ने शुक्रवार को घोषणा करते हुए बताया कि कर्फ्यू शनिवार सुबह तक लागू रहेगा. अवामी लीग ने बांग्लादेश के सुरक्षा बोलों पर भी इल्जाम लगाए हैं. लोगों ने कहा कि यूनुस सरकार के जरिए कर्फ्यू थोपने और पूरी तरह से छूट दिए जाने के बाद, बांग्लादेश की सशस्त्र सेनाओं और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सदस्य गोपालगंज में निहत्थे नागरिकों पर घातक कार्रवाई कर रहे हैं.
आवामी लीग ने जोर देते हुए कहा कि 48 घंटे बीत जाने के बाद भी यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के किसी शीर्ष अधिकारी ने पीड़ित परिवारों की कोई मदद नहीं की. इतना ही नहीं, डरे-सहमे परिजनों को इन सुरक्षा बलों द्वारा की गई कथित 'गैर-न्यायिक हत्याओं के खिलाफ एक भी केस दर्ज करने की अनुमति नहीं दी गई. यह इस बात का साफ संकेत है कि सरकार राज्य तंत्र का दुरुपयोग कर रही है.