इन्हें पिछले वर्ष शाहजहांपुर की एक मस्जिद से महामारी से संबंधित दिशा- निर्देशों के उल्लंघन के इल्जाम में गिरफ्तार किया गया था. इससे पहले भी देशी की कई अदातलें जमात में शामिल लोगों को उनपर लगे आरोपों के सबूतों के अभाव में रिहा कर दिया था.
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बरेलीः बरेली की एक मुकामी अदालत ने जुमे को सबूतों के अभाव में तबलीगी जमात के 12 सदस्यों को बरी कर दिया जिनमें थाईलैंड के नौ नागरिक भी शामिल हैं. बचाव पक्ष के वकील मिलन कुमार गुप्ता ने बताया कि तबलीगी जमात के 12 सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिनमें थाईलैंड के नौ नागरिक, तमिलनाडु के दो लोग और एक स्थानीय नागरिक शामिल है. इन्हें पिछले वर्ष शाहजहांपुर की एक मस्जिद से महामारी से संबंधित दिशा निर्देशों के उल्लंघन के इल्जाम में गिरफ्तार किया गया था. शाहजहांपुर के सदर थाने में तबलीगी जमात के सदस्यों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, महामारी अधिनियम, आपदा प्रबंधन अधिनियम, विदेशी और पासपोर्ट अधिनियम की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी. मामले पर सुनवाई बरेली में हुई थी. गुप्ता ने बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान तबलीगी जमात के सदस्यों ने खुद को बेकसूर बताया.
दिल्ली की अदालत ने 36 विदेशियों को किया था रिहा
गौरतलब है कि इससे पहले भी देश में मुंबई हाईकोर्ट और दिल्ली की एक आलत समेत इलाहाबाद हाईकोर्ट भी तबलीगी जमात से जुड़े कई देशी और विदेशी नागरिकों को आरोपों से बरी कर उन्हें रिहा कर चुकी है. 15 दिसंबर 2020 को दिल्ली की एक अदालत ने देश में कोविड-19 महामारी के मद्देनजर जारी सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करते हुए कथित तौर पर तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए आरोपों का सामना कर रहे 36 विदेशियों को को बरी कर दिया था. इनमें 14 देशों के नागरिक शामिल थे. इससे पहले साकेत अदालत ने ठोस सबूत नहीं मिलने पर छह देशों के आठ विदेशी नागरिकों को भी आरोपमुक्त कर दिया था. उनके खिलाफ भी आरोप-पत्र दाखिल किए गए थे.
सभी पर लगाए गए थे ये आरोप
अदालत ने इन लोगों को आरोपमुक्त करते हुए कहा था कि पूरे आरोप-पत्र और अन्य दस्तावेजों को देखने के बाद पता चलता है कि ये लोग उस अवधि में मरकज के कार्यक्रम में मौजूद ही नहीं थे. वीजा नियमों का कथित तौर पर उल्लंघन करते हुए मिशनरी गतिविधियों में हिस्सा लेने, कोविड-19 के मद्देनजर सरकारी निर्देशों का पालन नहीं करते हुए निजामुद्दीन इलाके में तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए विदेशियों के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया गया था.
क्यों चर्चा में आए थे जमाअत के लोग
जमात के लोग तब चर्चा में आए थे, जब मार्च में दिल्ली का निजामुद्दीन मरकज कोरोना हॉटस्पॉट बनकर उभरा था. दिल्ली पुलिस ने वीजा शर्तों के कथित उल्लंघन, धार्मिक प्रचार गतिविधियों में शामिल होने समेत कई आरोपों में करीब 955 विदेशियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी.हालांकि मामला दर्ज होने के बाद जमात के अधिकतर सदस्यों ने याचिका पर समझौता कर लिया था और अपने देश वापस लौट गए थे, वहीं 44 ने दिल्ली में मुकदमा लड़ने का फैसला किया था.
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