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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से ज़ी सलाम के ए़डिटर इरफान शेख़ ने खास बातचीत की है. इरफान शेख ने भूपेश बघेल से छत्तीसगढ़ के बारे में कई बातें पूछीं. बघेल ने सभी सवालों का बेबाकी से जवाब दिया.
छत्तीसगढ़ को जिस तरह से लोग जानते हैं चाहे वह भारत हो या भारत के बाहर उसकी बहुत अच्छी छवि नहीं है.
इस सवाल के जवाब में भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ पिछले कुछ दिनों में नक्सलियों के लिए जाना जाने लगा है. जबकि छत्तीसगढ़ की हर युग हर काल में अलग पहचान रही है. अजादी के दौर में सैकड़ों लोगों ने महात्मा गांधी के साथ लड़ाई लड़ी. इतिहास की बात करें तो भगवान कृष्ण का वहां आगमन हुआ है. वहां बाल्मीकी का आश्रम है. वहां सीता जी रही हैं. संस्कृति की दृष्टि से भी छत्तीसगढ़ का अलग महत्व है. वहां का दशहरा बहुत अलग है, वहां का दशहरा अलग है. एक-एक चीज अध्ययन करने लायक है.
देश का प्रधानमंत्री हिंदू, राष्ट्रपति हिंदू, चीफ जस्टिस हिंदू, CBI डायरेक्टर हिंदू, NHRC का हेड हिंदू, ED का डायरेक्टर हिंदू, NSA हिंदू, होम मिनिस्टर हिंदू, रक्षा मंत्री हिंदू तो हिंदू खतरे में कैसे है?
इस सवाल के जवाब में भूपेश बघेल ने कहा कि यह हिंदू खतरे में तब आया जब चुनाव की राजनीति आई. तब से धर्म हमारे खतरे में हैं. लेकिन 52 से पहले चुनाव नहीं होते थे इस देश में तब कोई खतरा नहीं था. उन्होंने कहा कि जो लोग इस तरह की बात करते हैं वह सिर्फ अपने स्वार्थ के ऐसा करते हैं. दूसरे शब्दों में अपनी नाकामी छुपाने के लिए ऐसा काम करते हैं. क्योंकि वह जनता के लिए कुछ कर नहीं पाए हैं. इसीलिए जैसे ही किसी राज्य में चुनाव आता है वहां धर्म खतरे में पड़ जाता है. जैसे ही चुनाव खत्म हो जाता है तो उस राज्य में धर्म खतरे में नहीं रहता है.
लोग कहते हैं कि राम को हम ले आए हैं. तो क्या ऐसा था कि राम कहीं चले गए थे?
इस सवाल के जवाब में भूपेश बघेल ने कहा कि दरअसल राम बहुत व्यापक है उन्हें मंदिरों में कैद नहीं किया जा सकता वह सबके दिलों में रहने वाले हैं. वही राम तुलसी के हैं, महात्मा गांधी के भी हैं. अदालत ने फैसला दिया है उस पर मंदिर बन ही रहा है. लेकिन यह राम को उद्धार करने वाले कब से बन गए. राम तो सबके उद्धारक हैं.
क्या आपको लगता है कि किसानों के लिए कुछ किया गया है? या युवाओं के लिए कुछ किया गया है? महंगाई को रोकने के लिए कुछ किया गया है? आपके हिसाब से असल मुद्दे क्या हैं?
इस सवाल के जवाब में भूपेष बघेल ने कहा कि 70 के दशक में देश में अनाज की भारी किल्लत हुई थी. उसी दौरान मिनिमम सपोर्ट प्राइज जारी हुआ था. इंदिरा के वक्त सरकार किसानों का नुक्सान नहीं होने देती थी. सबने मिलकर हरित क्रांति की. उसके बाद हालत बदली अब अगर भारत में तीन साल तक सूखा पड़ जाए तो अनाज की किल्लत नहीं होगी. लेकिन आज किसान आंदोलित हैं. उन्हें फसल का पैसा नहीं मिल रहा है. स्टोरेज में आलू रखने की जगह नहीं है. गन्ने का भुगतान नहीं हो रहा है. सरकार किसी समस्या को ध्यान में रख कर उसपर विचार या निर्णय नहीं कर रही है.
जब से Cow Protection हुआ है तब से यूपी में एक दिक्कत देखी गई है कि जानवर फसल खा जाते हैं. क्या यह परेशानी आपके यहां है? आपने इसको कैसे ठीक किया?
इस सवाल के जवाब में भूपेश बघेल ने कहा कि पहले पशुओं का बाजार लगता था. अब खरीदने बेचने का काम समाप्त हो गया है. अगर कोई पशु ले जाते हुए दिख जाता है तो बजरंगी या बीजेपी के लोग उसकी पिटाई कर देते थे कि यह कत्ल खाना ले जा रहे हैं. कोई अगर पशुओं को खरीदने या बेचने के लिए जा रहा है तो भी उसे उसी निगाह से देखा जाता था. इसलिए पूरे भारत में पशुओं का व्यापार खराब हो गया. अब जो पशु दूध देने वाले हैं उन्हें रख लिया जाता है बाकी के जानवरों को खुले में छोड़ दिया जाता है. फसल बचाना मुश्किल है. बघेल ने बताया कि इस समस्या हल हमने ऐसे निकाला कि दूध वाली गाय को लोग अपने पास रख रहे हैं. लेकिन बेकार जानवरों को लोग अपने पास रखें इसके लिए हमने उसका गोबर दो रुपए किलो खरीदना शुरू किया.
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