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Jokihat Taslimuddin Family: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सबसे ज्यादा अररिया जिले में स्थित जोकीहाट विधानसभा सीट की चर्चा हो रही है. यहां कैंडिडेट किसी भी पार्टी का हो, लेकिन जीत का फैसला मुस्लिम वोटर ही करते हैं. जोकीहाट सीट पर जदयू, राजद और कांग्रेस जैसे दलों का लंबे वक्त तक दबदबा रहा है, जो इसे क्षेत्रीय राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाता है.
जोकीहाट को अपने सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है, जहां ग्रामीण और शहरी आबादी का मिश्रण देखने को मिलता है. इस विधानसभा में वोटर्स की संख्या और उनकी प्राथमिकताएं समय-समय पर बदलती रही हैं, जिसके चलते यह सीट चुनावी दृष्टिकोण से हमेशा चर्चा में रहती है. हाल के सालों में यहां राष्ट्रीय जनता दल (राजद), जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और अन्य क्षेत्रीय दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखा गया है.
1967 में अस्तित्व में आई जोकीहाट विधानसभा सीट पर अब तक 16 बार इलेक्शन हुए हैं, जिनमें 1996 और 2018 में हुए दो उपचुनाव शामिल हैं. इस सीट की सबसे खास बात यह है कि यहां से अब तक सभी विधायक मुस्लिम समुदाय से ही चुने गए हैं, जिसकी वजह से क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की भारी संख्या (लगभग 65.70 फीसद) है.
जोकीहाट सीट पर लंबे वक्त तक सीनियर नेता मोहम्मद तस्लीमुद्दीन और उनके परिवार का दबदबा रहा है. तस्लीमुद्दीन और उनके बेटों ने 16 में से 10 बार इस सीट पर कब्जा जमाया. तस्लीमुद्दीन ने कांग्रेस (1969), निर्दलीय (1972), जनता पार्टी (1977, 1985) और समाजवादी पार्टी (1995) से जीत हासिल की.
1996 में तस्लीमुद्दीन की राष्ट्रीय राजनीति में एंट्री होने के बाद उनके बेटे सरफराज आलम ने विरासत संभाली. उन्होंने 1996 के उपचुनाव में जनता दल और 2000 में राजद से जीत दर्ज की. हालांकि, 2005 के इलेक्शन में जदयू के मंजर आलम ने उन्हें मात दी. 2010 के इलेक्शन में सरफराज आलम ने फिर से वापसी की और उनकी जीत का सिलसिला 2015 में भी जारी रहा. उन्होंने दोनों बार जीत जदयू के टिकट पर हासिल की.
कितने फीसद है मुस्लिम वोटर्स
2020 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों की बात करें तो जोकीहाट में कुल 2,93,347 मतदाता रजिस्टर्ड थे, जिनमें 1,92,728 (65.70 फीसद) मुस्लिम और 22,001 (7.5 फीसद) सूचित जाति के मतदाता थे. हालांकि, लोकसभा चुनाव 2024 में यहां मतदाताओं की संख्या में इजाफा हुआ, जो 3,05,595 हो गया.
साल 2020 में दो भाईयों के बीच था मुकाबला
साल 2020 के विधानसभा इलेक्शन में इस सीट पर सियासी ड्रामा भी देखने को मिला था. राजद ने तस्लीमुद्दीन के बेटे सरफराज आलम को यहां से उतारा था, जबकि उनके भाई शाहनवाज आलम को AIMIM ने टिकट दिया था. दोनों भाइयों की इस लड़ाई ने जोकीहाट की लड़ाई रोमांचक बनाया और इस सीट पर शाहनवाज आलम ने एआईएमआईएम के टिकट पर जीत हासिल की. हालांकि, कुछ समय बाद वह राजद में शामिल हो गए.
इनपुट- IANS