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Nitish Kumar appeals Muslim Voters for voting JDU: बिहार में चुनावी साल है. दो माह बाद विधान सभा के चुनाव होने हैं. ऐसे में सभी सियासी पार्टियां जंगी सतह पर चुनाव प्रचार में जुट गयी हैं. विपक्ष जहाँ सरकार की नाकामियां गिना रहा है, वहीँ सरकार अपनी उपलब्धियां बता रही है. उनके बिना पर लोगों से वोट की अपील कर रही है.
गुरुवार को पटना के बापू सभागार में बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड का शताब्दी समारोह मनाया जा रहा था. इस प्रोग्राम में सीएम नीतीश कुमार समेत कई कैबिनेट मंत्री पहुंचे थे. दावा किया जा रहा है कि इस प्रोग्राम में मदरसा एजुकेशन से जुड़े लगभग 15 हज़ार लोग पहुंचे थे.
इस मौके पर नितीश कुमार मुसलमानों के लिए किये गए कामों को गिनवा रहे थे. उन्होंने ये भी कहा कि जबसे उनकी सरकार है, बिहार में एक भी दंगा- फसाद नहीं हुआ जबकि उसके पहले बिहार में दंगा- फसाद आम था. यहाँ नितीश कुमार का दावा बिलकुल गलत था, हाल में बिहार कई दंगों का गवाह रहा है. उनके किये जा रहे काम के दावे भी सही नहीं थे. इसलिए मंच के नीचे से आवाज़ आयी नहीं हुआ है हमारा काम.. 50 फीसदी काम आज भी अधूरे हैं.
सभागार में मौजूद लोगों ने नितीश के दावों पर विरोध जताया और कहा बहुत काम बचा हुआ है. कब्रिस्तान का घेराबंदी 50 परसेंट किया है. मस्जिद के इमाम को आज तक तनख्वाह नहीं दिया गया है. सरकार से मांग करते हुए कहा मदरसा को पेमेंट नहीं दिया गया है. हालांकि, सीएम नीतीश कुमार ने इस विरोध की आवाजों पर ध्यान नहीं दिया. वहीँ, जदयू के कुछ समर्थकों उनकी मौजूगी में नितीश कुमार जिंदाबाद और अल्ल्हू अकबर के नारे भी लगाये.
बापू सभागार में बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड का शताब्दी समारोह के इस प्रोग्राम में नितीश कुमार ने पूर्ववर्ती राजद सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले की सरकार ने कुछ नहीं किया. जब हमारी सरकार बनी तब हमने काम करना शुरू किया. उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज़ में कहा, " इससे पहले कोई काम करता था जी. राज्य का बहुत बुरा हाल था. जब से एनडीए की सरकार बनी तब से हम राज्य का विकास में लगे हुए हैं."
स्कूल शिक्षक के बराबर दिलाया मदरसा शिक्षकों को वेतन
नितीश कुमार ने ये भी दावा किया कि पहले की सरकारों में मुस्लिम समाज के लिए कोई काम नहीं किया जाता था, लेकिन जब से NDA की सरकार बनी है, तभी से सच्चे मायनों में बिहार के मुसलमानों के लिए अच्छे दिन आये हैं. नितीश ने कहा कि पहले बिहार में हिंदू-मुस्लिम झगड़ा बहुत ज्यादा होता था. लेकिन जब से उनकी सरकार है ये सब बंद हो गया है. उन्होंने मुसलमानों के कब्रिस्तान की घेराबंदी का काम करवाया है. 2006 नितीश की सरकार ने इस काम को सरकारी मान्यता दी थी. मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि उनकी सरकार में मदरसा के शिक्षकों को भी और शिक्षकों जैसा वेतन दिया जाता है जबकि पहले की सरकारों में मदरसा में शिक्षक को कोई पैसा नहीं देता था.
भागलपुर दंगों के पीड़ितों को इन्साफ दिलाने का दावा
नितीश कुमार ने यहाँ तक दावा किया कि 2005 में जब वो भागलपुर गए थे तो मुस्लिम समाज के लोगो ने बताया की भागलपुर में 1989 में हुए दंगों के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई और न ही उनके नुक्सान का उन्हें कोई मुआवजा दिया गया. फिर जब जदयू की सरकार बनी तो दोषियों को सजा और मुआवज़ा दिलाने का काम नितीश सरकार में हुआ. हालांकि, दो दिन पहले ही भागलपुर दंगों के आरोपी सिर्फ इसलिए बरी हो गए कि उनके डर से गवाह गवाही देने अदालत नहीं जा पाते थे. उन्हें डराया- धमकाया जाता था. कई अखबारों ने इसे रिपोर्ट किया है.
तलाक शुदा महिलाओं सरकार ने दिया मुआवजा
नितीश कुमार ने मंच से बोलते हुए मुस्लिम समाज पर तंज के लहजे में ये भी कहा कि मुस्लिम समाज में बहुत लोग अपनी बीवी को छोड़ देते थे. आप लोग किसी को नहीं छोड़िएगा. उन्होंने कहा कि जब हमको इस समस्या के बारे में मालूम हुआ तो महिलाओं के लिए हमने काम करना शुरू किया. मुस्लिम तलाक शुदा महिलाओं को पैसा देना हमारी सरकार ने ही शुरू किया.
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का बजट बढ़ाया
नितीश ने कहा कि बिहार में पहले अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का बजट बहुत कम होता था, लेकिन उनकी सरकार ने बजट को बहुत बढ़ा दिया है. उन्होंने कहा, "आज मुस्लिम वर्ग की छात्र और छात्राओं की पढ़ाई में मदद किया जा रहा है. अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही है. आपको कोई दिक्कत हो तो हमें बताइए. हम सबके हित में काम करेंगे."
नितीश कुमार के के दावों में 100 फीसदी अगर सच्चाई न भी हो, लेकिन इतना ज़रूर है कि उनकी सरकार ने राज्य में अल्पसंख्यकों के लिए पहले की सरकारों से ज्यादा काम किया है. बिहार के मुसलमानों का एक बड़ा तबका इस हकीकत को स्वीकार भी करता है, लेकिन वो भाजपा के साथ नितीश कुमार की जुगलबंदी को हमेशा से शक और डर की निगाह से देखता है. तीन तलाक, CAA और वक्क संशोधन बिल पर नितीश का केंद्र में सरकार को समर्थन भी मुसलमानों को खल गया! मुसलमानों को उम्मीद थी कि जदयू इन मुद्दों पर सरकार से अलग खड़ी होगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ. जदयू ने इन बिलों पर सरकार का खुला समर्थन किया. इससे जदयू को मिलने वाला मुसलमानों का १० फीसदी वोट भी अब संदेह के दायरे में आ गया है.
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