Nitish Kumar on Waqf Bill: बिहार के सीएम नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने वक्फ बिल पर अपना स्टैंड क्लियर कर दिया है. देखना दिलचस्प होगा कि वक्फ संशोधन बिल पर एनडीए के भीतर मतभेद किस दिशा में जाते हैं.
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Nitish Kumar on Waqf Bill: वक्फ संशोधन बिल 2024 को लेकर देशभर में बहस जारी है. यह बिल 2 अप्रैल को लोकसभा में पेश किया जाएगा. इसी बीच, जराए ने दावा किया है कि बिहार के सीएम नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने वक्फ बिल पर अपना स्टैंड क्लियर कर दिया है. नीतीश कुमार ने वक्फ बिल में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर अपनी चिंताओं को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाया. इसे लेकर JDU के राज्यसभा सांसद संजय झा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और नीतीश कुमार की चिंताओं को स्पष्ट रूप से उनके सामने रखा.
सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार की पार्टी ने वक्फ बिल को लेकर तीन प्रमुख संशोधन प्रस्ताव दिए थे. यह सभी प्रस्ताव संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के सामने रखे गए थे, और अब दावा किया जा रहा है कि JPC ने इन प्रस्तावों को स्वीकार कर लिया है. इससे पहले JDU ने इस बिल पर कड़ा रुख अपनाते हुए अल्पसंख्यक समुदाय के हितों की रक्षा को लेकर चिंता जाहिर की थी और जराए ने दावा किया था कि नीतीश कुमार वक्फ बिल का समर्थन नहीं करेंगे, लेकिन अब साफ हो गया है कि नीतीश कुमार के तरफ से मोदी सरकार को हरी झंडी मिल गई है. हालांकि, यह फैसला तभी साफ होगा जब लोकसभा में इस बिल पर चर्चा होगी और JDU का आधिकारिक रुख सामने आएगा.
दरअसल, बिहार के सीएम नीतीश कुमार को मुस्लिम वोट बैंक खोने का डर है, इसलिए उनकी पार्टी जेडीयू ने वक्फ संशोधन बिल पर अभी तक अपना रुख स्पष्ट नहीं किया था. बिहार में मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा वोट बैंक जेडीयू के साथ रहा है, लेकिन हाल ही में बीजेपी के साथ गठबंधन के बाद अल्पसंख्यकों में नाराजगी देखी जा रही है. वक्फ बिल का विरोध करके नीतीश कुमार अपनी सेक्यूलर छवि को बनाए रखना चाहते हैं. इससे पहले जेडीयू का रुख सीएए और ट्रिपल तलाक जैसे मुद्दों पर नरम था, लेकिन इस बार वे मुस्लिम वोटरों को लुभाने के लिए इसका सीधा विरोध कर रहे हैं.
JDU MLC गुलाम गौस ने बिल पर जताई थी चिंता
वहीं, JDU MLC गुलाम गौस ने कहा, "मैं वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध करने वाला पहला व्यक्ति था. जब से यह केंद्र सरकार आई है, कभी लव जिहाद, सीएए, मॉब लिंचिंग, तीन तलाक और अब यह, यह हमारा धार्मिक मामला है. आपने (केंद्र ने) हमारे अधिकारों की रक्षा के लिए कुछ नहीं किया." उन्होंने कहा, "मौलाना आजाद फाउंडेशन द्वारा दी जाने वाली छात्रवृत्ति भी बंद कर दी गई. विविधता में एकता हमारी विशेषता है. मैं निश्चित रूप से इन सभी मुद्दों को उनके (सीएम नीतीश कुमार) सामने उठाऊंगा."
क्या है वक्फ संशोधन बिल?
वक्फ संशोधन बिल का मकसद देश में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है. सरकार का दावा है कि इस बिल से वक्फ संपत्तियों की देखरेख बेहतर होगी और भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी लेकिन कई मुस्लिम संगठनों और राजनीतिक दलों को आशंका है कि यह बिल वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता को कमजोर कर सकता है और सरकार को इन संपत्तियों पर अधिक नियंत्रण दे सकता है.
कांग्रेस और विपक्ष का हमला
कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने इस बिल को लेकर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा, "यह बिल संविधान पर सीधा हमला है. TDP और JDU जैसी धर्मनिरपेक्ष पार्टियों को यह तय करना होगा कि वे अल्पसंख्यकों के अधिकारों के साथ खड़ी हैं या फिर सरकार की कठपुतली बनकर काम करेंगी."
बीजेपी की बढ़ी मुश्किलें
जेडीयू के इस रुख के बाद सरकार के लिए संसद में इस बिल को पास कराना मुश्किल हो सकता है. खासकर राज्यसभा में, जहां बीजेपी के पास पूर्ण बहुमत नहीं है, जेडीयू और टीडीपी का समर्थन न मिलना सरकार के लिए चुनौती बन सकता है. हालांकि, बीजेपी अपने सहयोगियों को मनाने की कोशिश कर सकती है ताकि इस बिल को पास कराया जा सके. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वक्फ संशोधन बिल पर एनडीए के भीतर मतभेद किस दिशा में जाते हैं और नीतीश कुमार अपने रुख पर कायम रहते हैं या नहीं.