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नई दिल्ली/नदीम अहमद: कोरोना वबा और सैलाब मुतास्सिर बिहार में असेंबली इंतेखाबात से पहले रोज़ नए-नए इत्तेहाद (गठबंधन) बन तो रहे हैं लेकिन दिलचस्प नज़ारा तो इंतेख़ाबात के बाद ही देखने को मिलने वाला है. ऐसा इसलिए है क्यूंकि गुज़िश्ता 6 सालों में जिस पार्टी ने सब से ज़्यादा सीटें जीती वो सत्ता से बाहर है और तोड़-जोड़ की सियासत ने करवट बदल कर नए-नए इत्तेहाद को सत्ता की कुर्सी पर बिठाया है. महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, गोवा, मणिपुर जैसी सियासत मजबूरी के इत्तेहाद का सबूत हैं.
बिहार में कितने इत्तेहाद!
बिहार की सियासत में ये पहला इंतेख़ाब होगा जिसमे एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं, बल्कि चार से ज़्यादा इत्तेहाद बन रहे हैं. एनडीए में जद(यू) + बीजेपी + लोजपा + हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा हैं तो अज़ीम इत्तेहाद में राष्ट्रीय जनता दल + कांग्रेस + लेफ़्ट + वीआईपी जैसी जमाते हैं. इनके अलावा बिहार में सरगरम पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी (लोकतान्त्रिक) + चंद्रशेखर आज़ाद की सदारत वाली आजाद समाज पार्टी + एमके फैजी के सदारत वाली सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी यानी एसडीपीआई और बीपीएल मातंग की बहुजन मुक्ति पार्टी शामिल हुई है. वहीं साबिक़ मरकज़ी वज़ीर और रालोसपा के सद्र उपेंद्र कुशवाहा ने यूपीए को अलविदा कह दिया है. माहिरीन की मानें तो कुशवाहा बिहार में चौथे इत्तेहाद बनाने की फ़िराक़ में हैं जिसमे बीएसपी और वीआईपी पार्टी को शामिल करने की कोशिश की जा रही है. इन चार इत्तेहाद के अलावा हैदराबाद को लोकसभा एमपी और एआईएमआईएम के सद्र असदुद्दीन ओवैसी भी अकेले मैदान में नज़र आरहे हैं.
क्या करेगी बिहार की अवाम!
बिहार की अवाम के सामने इस दफ़ा सबसे बड़ा चैलेंज ये है के वो कोरोना और बाढ़ के दौरान वोट कैसे करेगी. हालांकि इलेक्शन कमीशन ने ये साफ़ कर दिया है के पोलिंग बूथ पर हर तरह के इंतेज़ाम रहेंगे. एक बूथ पर सिर्फ़ एक हज़ार ही वोटिंग होगी लेकिन इन तमाम तरह के वादों के बावजूद हमारे मुल्क के किसी भी इंतेखाबात में अवाम वोटिंग को अहम नहीं समझती. आम दिनों में वोटिंग फ़ीसद 55 से 60 फ़ीसद रहती है तो कोरोना और सैलाब से मुतास्सरीन अवाम के सामने सब से बड़ा चैलेंज ये होगा के वो किस तरह से अपने हक़ राये दही का इस्तेमाल करते हैं. उनके सामने इस दफ़ा इतने इत्तेहाद हैं कि वोटों का बड़े पैमाने पर तक़सीम होना लाज़मी है. सब से दिलचस्प बात ये होगी के जब इन्तेख़ाबात के बाद नतीजे आएंगे तब कौन सी पार्टी किस इत्तेहाद में रहेगी ये भी हमें बिहार में देखने को ज़रूर मिलेगा.
बिहार में वोटरों की तादाद
बिहार में कुल 7 करोड़ 6 लाख 3778 वोटर्स हैं। मर्द और ख़ातून वोटर्स की तादाद में 40 लाख 14432 का फ़र्क़ है। बिहार में कुल 243 असेंबली सीटों में 38 schedule क्लास के लिए रिजर्व हैं तो दो सीटें एसटी के लिए रिज़र्व हैं। 2020 में होने जा रहे असेंबली इंतेखाबात के लिए इलेक्शन कमीशन ने कुल 1,06,526 पोलिंग बूथ बनाए हैं। जबकि 2015 में 65,367 पोलिंग बूथों पर वोटिंग हुई थी। इस तरह से कोरोना की वजह से 62.96 फ़ीसद पोलिंग बूथ का इज़ाफ़ा हुआ है.
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