Kerala civic elections: केरल में अगले महीने निकाय चुनाव के लिए मतदान होने हैं. भाजपा ने इसमें लगभग 21 हज़ार उम्मीदवार उतारे हैं. 26 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले इस राज्य में भाजपा मुस्लिम वोटर्स से भी वोट मांग रही है, और उन्हें भाजपा में हासिये पर भेज दिए गए मुख्तार अंसारी, शाहनवाज़ हुसैन जैसे नेता और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का हवाला दे रही है..
Trending Photos
)
Kerala civic elections: केरल में स्थानीय निकाय के चुनाव होने हैं. चुनाव दो चरणों में 9 और 11 दिसंबर को कराए जाएंगे. इस चुनाव में भाजपा इस बार एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है. भाजपा ने NDA के कुल 21 हज़ार से ज्यादा उम्मीदवार उतारे हैं, इनमें अकेले भाजपा के 19 हज़ार 871 उम्मीदवार हैं.
भाजपा के राज्य महामंत्री एस. सुरेश ने बताया कि भाजपा इस बार नगर निगमों में 99 फीसदी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी, वहीँ क्लॉक और पंचायतों में लगभग 93 फीसदी सीटों पर अपने लोगों को टिकट देकर चुनावी मैदान में उतारेगी. भाजपा को इस बार उम्मीद है कि इस बार केरल में पार्टी निकाय चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करेगी, क्योंकि कांग्रेस और वाम दलों के बीच अभी तक कोई गठबंधन नहीं हुआ है, और देनों दलों के बीच आंतरिक कलह साफ़ दिख रहा है. दोनों एक दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार उतार रहे हैं.
केरल में लगभग 26 फीसदी मुस्लिम आबादी है. ऐसा माना जाता है कि मुस्लिम वोट या तो वाम दलों के खाते में जाते हैं या फिर कांग्रेस के खाते में. भाजपा इस बार मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने की पूरी कोशिश कर रही है. कई दिग्गज नेताओं को केरल में पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए भेजा गया है. भजपा ने केरल के इस लोकल बॉडी इलेक्शन में कई मुस्लिम BJP कैंडिडेट को वाम दलों और कांग्रेस के मुकाबिल खड़ा किया है.
बुधवार को भाजपा सांसद और केरल BJP प्रेसिडेंट राजीव चंद्रशेखर ने कहा, "सच तो यह है कि मुसलमान हमें वोट नहीं देते हैं, लेकिन कांग्रेस को वोट देकर उन्हें आखिर क्या मिलता है? हमने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया है. BJP में मुस्लिम MP और नेता हैं. मुख्तार अब्बास नकवी और शाहनवाज़ हुसैन इसके उदाहरण हैं. आज भी, जम्मू -कश्मीर से राज्यसभा में मुस्लिम MP हैं. पूर्व प्रेसिडेंट APJ अब्दुल कलाम NDA के शासनकाल में प्रेसिडेंट बने थे. हमने अपना काम किया है. 2017 से पहले, केरल से एक भी कैबिनेट मिनिस्टर नहीं था. हमारे नेशनल वाइस प्रेसिडेंट अब्दुल्लाकुट्टी हैं, और हमारे स्टेट वाइस प्रेसिडेंट अब्दुल सलाम हैं." राजीव चंद्रशेखर ने आगे कहा, " BJP जमात-ए-इस्लामी नहीं है. हम कॉन्स्टिट्यूशन और डेमोक्रेसी में विश्वास करते हैं. जमात-ए-इस्लामी खुलेआम कहता है कि उन्हें कॉन्स्टिट्यूशन नहीं चाहिए और डेमोक्रेसी में विश्वास नहीं है. हम मुस्लिम कम्युनिटी का विश्वास जीतने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे और LDF और UDF के इस ज़हरीले कैंपेन को खत्म करेंगे."
राजीव चंद्रशेखर ने कहा, "पिछले 30 सालों से यह गलत धारणा बनाई गई है कि भाजपा एक कम्युनल और एंटी-मुस्लिम पार्टी है. यह दोगलापन है. हम खुले तौर पर कहते हैं कि हम सबके लिए काम करते हैं. इस गलतफहमी को दूर करने के लिए, प्रो. अब्दुल सलाम की लीडरशिप में एक मुस्लिम आउटरीच टीम बनाई गई है. वे लोगों से मिल रहे हैं, बातचीत कर रहे हैं, वोट के लिए नहीं, बल्कि यह समझने के लिए कि ऐसी गलतफहमियां क्यों हैं? BJP हर धर्म का सम्मान करती है. हमने कभी किसी धर्म के खिलाफ काम नहीं किया है, और न ही कभी करेंगे. यह कहानी कि BJP एंटी-मुस्लिम है, LDF और कांग्रेस ने बनाई है. लेकिन हम जमात-ए-इस्लामी और SDPI के खिलाफ हैं, क्योंकि वे संविधान के खिलाफ काम करते हैं. हम उन लोगों के भी खिलाफ हैं जो LDF और कांग्रेस का सपोर्ट करते हैं. BJP संविधान विरोधी ताकतों के खिलाफ खड़ी है, किसी धर्म के खिलाफ नहीं."
राजीव चंद्रशेखर का ये एकतरफा संवाद था. उनके प्रेस कांफ्रेंस के बाद कई मुसलमानों ने पूछा है कि भाजपा का जो एप्रोच अभी केरल में राजीव चंद्रशेखर बता रहे हैं, वहीं भाजपा शासित राज्यों में क्यों नहीं दिखता है ? भाजपा में मुस्लिम चेहरे के तौर पर पार्टी आखिर मुख्तार अब्बास नकवी और शाहनवाज़ हुसैन को कब तक बेचेगी, जब कि पार्टी में वरिष्ठ होते हुए वो दोनों नेता लम्बे अरसे से किसी जिम्मेदारी के ओहदे पर नहीं है. पार्टी उनसे चुनावों में टिकट नहीं देती है. लोकसभा चुनाव में पार्टी ने किसी मुस्लिम उमीदवार को टिकट नहीं दिया. हाल में बिहार विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारे.. भाजपा शासित मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और असम सरकारे जो मुसलमानों के साथ भेदभाव कर रही है.. उसे टारगेट कर रही है, ये खुली आँखों से सभी को नज़र आ रहा है.
मुस्लिम माइनॉरिटी की खबरों के लिए विजिट करें https://zeenews.india.com/hindi/zeesalaam