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बदला जाएगा मुजफ्फरनगर का नाम; मुसलमानों की प्रतिक्रिया सुनकर चौंक जाएंगे आप

Muzaffarnagar News: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले का नाम बदले की मांग एक बार फिर उठने लगी है. भाजपा नेता मोहित बेनिवाल ने मांग की है कि मुजफ्फरनगर का नाम बदल कर लक्ष्मीनगर कर दिया जाए. इस मांग के बाद मुजफ्फर नगर के लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है. 

 

बदला जाएगा मुजफ्फरनगर का नाम; मुसलमानों की प्रतिक्रिया सुनकर चौंक जाएंगे आप

Muzaffarnagar News: भाजपा शासित राज्य उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ सालों में उर्दू नाम वाले कई जिलों के साथ रेलवे प्लेटफॉर्म के नाम बदले गए है. इसी बीच भाजपा से विधान परिषद सदस्य मोहित बेनीवाल ने सदन में मुजप्फरनगर का नाम बदलने की मांग की है. उन्होंने कहा है कि मुज़फ्फरनगर का नाम बदलकर लक्ष्मीनगर रख दिया जाए. 

लोगों ने क्या कहा
भाजपा नेता मोहित बेनिवाल की इस मांग के बाद मुजफ्फरनगर के लोगों ने मीडिया से बात करते हुए अलग-अलग रिएक्शन दिया है.  मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मुज़फ्फरनगर का नाम लक्ष्मीनगर कर दो या गणेश नगर, हमे कोई फर्क नहीं पड़ता है. वहीं कुछ मुस्लिम लोगों ने कहा कि विकास की बात करेंगे तो अच्छा रहेगा. कुछ मुस्लिम नौजवानों ने कहा कि नाम बदलना सही बात नहीं है. वहीं कुछ मुस्लिम व्यपारियों ने कहा कि नाम बदलने से अच्छा विकास पर ध्यान दें.

मुजफ्फरनगर के सांसद ने कही ये बात
भाजपा नेता की इस मांग के बाद समाजवादी पार्टी के नेता और मुजफ्फरनगर के सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा की जिला का नाम बदलने की मांग की जगह इलाके में कोई कारखाना लगाने की मांग करते तो अच्छा रहता, जिससे इलाके के नौवजवानों को रोजगार मिलता. वहीं, वकील अजय पुंडीर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि नाम बदलने वाली मांग बिल्कुल सही है. उन्होंने कहा कि मुज़फ्फरनगर का पुराना नाम लक्ष्मिनगर ही था, और नही होना चाहिए.

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पहले भी बदले जा चुके है नाम
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में इससे पहले भी उर्दू नाम वाले कई जगहों के नाम बदले गए है. जैसे इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया गया, फैजाबाद का नाम बदलकर अयोध्या कर दिया गाया और मुगल सराय रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर दीनदयाल उपाध्याय कर दिया गया. भाजपा सरकार की इस नीति पर हमेशा से मुस्लिम विरोधी और उर्दू विरोधी होने का आरोप लगते रहे है. हालांकि भाजपा पर लगे आरोपों के जवाब में बीजेपी नेता हमेशा यह दलील देते हैं कि वह आक्रांताओं और गुलामी की पहचान को खत्म करने की काम कर रहे हैं. 

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