हाईकोर्ट ने कहा है कि एक बालिग औरत को अपना पेशा चुनने का हक हासिल है और उसकी रज़ा मंदी के बगैर उसे हिरासत में नहीं लिया जा सकता.
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मुंबई: बॉम्बे हाई कोर्ट ने लोयर कोर्ट के हुक्म को पलटते हुए फैसला सुनाया है कि जिस्मफरोशी करना जुर्म नहीं है हालांकि अवामी मकामात पर ऐसा करना जुर्म होगा. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में तीन जिस्मफरोश ख्वातीन को एक इसलाही इदारे (सुधारग्रहों) से फौरी तौर पर रिहा करने का हुक्म दिया है.
हाईकोर्ट ने कहा है कि एक बालिग औरत को अपना पेशा चुनने का हक हासिल है और उसकी रज़ा मंदी के बगैर उसे हिरासत में नहीं लिया जा सकता. जस्टिस पृथ्वी चव्हाण ने जुमेरात के रोज़ दिए अपने हुक्म में कहा कि कानून के तहत कारोबारी मकसद के लिए जिंसी इस्तेहसाल करना या अवामी मकामात पर गैर मुहिज्ज़िबाना हरकत को जुर्म माना गया है.
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