AFSPA : पिछले साल 4 और 5 दिसंबर को नागालैंड के मोन जिले में सुरक्षा बलों द्वारा 14 लोगों के मारे जाने और 30 अन्य के घायल होने के बाद इसे निरस्त करने की मांग और तेज हो गई थी.
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नई दिल्ली/गुवाहाटीः केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah union home minister) ने गुरुवार को घोषणा की है कि केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम के तहत दशकों बाद नागालैंड, असम और मणिपुर में सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA ) के तहत अशांत क्षेत्रों को कम करने का फैसला किया है. शाह ने तीन अलग-अलग ट्वीट्स में बहुप्रतीक्षित निर्णय की घोषणा ऐसे समय पर की है, जब अधिकांश राजनीतिक दल और गैर सरकारी संगठन अफस्पा को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं. पिछले साल 4 और 5 दिसंबर को नागालैंड के मोन जिले में सुरक्षा बलों द्वारा 14 लोगों के मारे जाने और 30 अन्य के घायल होने के बाद इसे निरस्त करने की मांग और तेज हो गई थी.
In a significant step, GoI under the decisive leadership of PM Shri @NarendraModi Ji has decided to reduce disturbed areas under Armed Forces Special Powers Act (AFSPA) in the states of Nagaland, Assam and Manipur after decades.
— Amit Shah (@AmitShah) March 31, 2022
इन राज्यों के इन जिलों से हटाया जाएगा अफस्पा
तीन पूर्वाेत्तर राज्यों के अधिकारियों के अनुसार, नागालैंड में, सात जिलों के 15 पुलिस थानों के अधिकार क्षेत्र से अफस्पा को हटा दिया जाएगा.
केंद्र सरकार के नवीनतम निर्णय के बाद, मणिपुर में, छह जिलों के 15 पुलिस थाना क्षेत्रों को अशांत क्षेत्र अधिनियम से बाहर रखा जाएगा, जबकि असम में 23 जिलों से अफस्पा पूरी तरह से हटा दिया जाएगा और यह आंशिक रूप से एक जिले में लागू रहेगा. अफस्पा पर नया फैसला एक अप्रैल से प्रभावी होगा.
कहां लागू है और कहां हटाया गया था अफस्पा
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के तहत सुरक्षा स्थिति में सुधार के कारण, 2015 में त्रिपुरा और 2018 में मेघालय से अफस्पा के तहत अशांत क्षेत्र अधिसूचना को पूरी तरह से हटा दिया गया था.
असम में अशांत क्षेत्र अधिसूचना 1990 से लागू है. 2015 में, अफस्पा अरुणाचल प्रदेश के तीन जिलों, असम की सीमा पर अरुणाचल प्रदेश के 20 किमी बेल्ट और राज्य के 9 अन्य जिलों में 16 पुलिस थाना क्षेत्रों में लागू था. इसे धीरे-धीरे कम किया गया है और अशांत क्षेत्र अधिसूचना, वर्तमान में केवल तीन जिलों में और अरुणाचल प्रदेश के एक अन्य जिले में दो पुलिस थाना क्षेत्रों में लागू है. अशांत क्षेत्र अधिसूचना 1995 से पूरे नागालैंड में लागू है.
अफस्पा लागू होने से क्या होता है ?
बता दें कि अफस्पा सेना और अन्य केंद्रीय अर्ध-सैन्य बलों को बिना किसी पूर्व सूचना या गिरफ्तारी वारंट के कहीं भी छापेमारी, अभियान चलाने, किसी को भी गिरफ्तार करने की अनुमति देता है. यह कानून पूर्वाेत्तर के कई हिस्सों में लागू है. केंद्रीय गृह मंत्रालय समय-समय पर सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करते हुए अफस्पा की अवधि को छह महीने से बढ़ाकर एक साल कर देता है.
Cabinet meetings were held today & status of the disturbed area from 9 Police Stations has been withdrawn; accordingly, AFSPA Act is automatically lifted. It's in relation to the announcement of the Union Home Minister Amit Shah in the Parliament today: Manipur CM N Biren Singh pic.twitter.com/Klqq0FqcFr
— ANI (@ANI) March 31, 2022
आफस्पा हटाए जाने का सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया
मणिपुर के छह जिलों के 15 थानाक्षेत्रों को अशांत क्षेत्र अधिसूचना से बाहर करने के’’ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के ऐलान का बृहस्पतिवार को आफस्पा के विरूद्ध आंदोलन चलाने वाले प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सावधानीपूर्वक स्वागत किया और साथ ही इस ‘कठोर कानून’ को पूरी तरह नहीं हटाए जाने को लेकर असंतोष जताया. ह्यूमन राइट्स के निदेशक अलर्ट बबलू लोइटोंगबाम ने भी कहा, ‘‘ हम इसका स्वागत करते हैं। यह सही दिशा में उठाया गया कदम है लेकिन आफस्पा हटाने को लेकर हमारा आंदोलन जारी रहेगा.’’
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