उत्तर प्रदेश के चित्रकूट से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है. यहां दलित बस्ती में एक कब्रिस्तान पर विवाद चल रहा था. इस मामले में SDM कोर्ट ने अजीबो-गरीब फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन को सरकार के खाते में शामिल कर दिया है. पूरी खबर जानने के लिए नीचे स्क्रॉल करें.
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Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिला में एसडीएम कोर्ट ने कब्रिस्तान की जमीन को सरकारी जमीन के लिस्ट में शामिल कर लिया है. कब्रिस्तान की जमीन पर पिछले कई सालों से हिंदू पक्ष और मुस्लिम पक्ष में विवाद चल रहा था. इसी मामले में चित्रकूट जिला के SDM कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कब्रिस्तान की जमीन को सरकारी खाते में जोड़ दिया है. इस फैसले के बाद हिंदू पक्ष ने खुशी जाहिर की है. वहीं मुस्लिम पक्ष इस फैसले से नाखुश हैं.
क्या है पूरा मामला
दरअसल, यह मामला उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिला के लक्ष्मणपुरी गांव का है. लक्ष्मणपुरी गांव के पास एक दलित बस्ती के बीच एक कब्रिस्तान मौजूद है. सालों से इस जमीन पर हिंदू समाज होलिका दहन करता था और मुस्लिम समाज शवों को दफन करता था. लेकिन दोनो पक्षों में जमीन की मालिकाना हक को लेकर विवाद चल रहा था. विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन ने धारा 145 के तहत कार्रवाई करते हुए कब्रिस्तान की गेट पर ताला लगा दिया, और दोनो पक्षों से SDM कोर्ट में सबूत पेश करने का निर्देश दिया था. साथ ही दोनो पक्षों को प्रशासन ने साफ हिदायत दी थी कि विवादित जमिन से दूर रहे, और जब तक फैसला न हो जाए, इस जमीन पर कोई भी काम न करे.
हिंदू पक्ष ने क्या कहा
प्रशासन की निर्देश के बाद भाजपा से दलित नेता पवन प्रसाद बद्री ने कोर्ट के सामने जमीन से जुड़ी कई सबूत पेश किया. इस मामले में SDM ने लेखपाल की रिपोर्ट को देखने के बाद कब्रिस्तान की जमीन को सरकारी खाता में डाल दिया है. अब इस जमीन का मालिक सरकार है. फैसले पर भाजपा से दलित नेता और हिंदू पक्ष पवन प्रसाद बद्री ने खुशी जाहिर की है. साथ ही उन्होंने मुस्लिम पक्ष पर इल्जाम लगाते हुए कहा कि समाजवादी सरकार में सरकारी कागजों के साथ छोड़-छाड़ कर के विवादित जमीन को कब्रिस्तान बना दिया गया था. साथ ही उन्होंने कहा कि विवादित जमीन हिंदुओं की थी क्योंकि यह जमीन पुराने वक्त में राजा अमृत राव की थी. लेकिन सपा सरकार में इसे मुस्लिमों को दे दिया गया था.
कब्रिस्तान था और कब्रिस्तान ही रहेगा
हिंदू पक्षकार पवन प्रसाद ने कहा कि कब्रिस्तान में एक पीपल का पेड़ था. उस पेड़ के नीचे मुस्लिम समुदाय के लोग सड़े-गले लाश दफना देते थे. उन्होंने कहा कि उस जमीन पर हिंदू समुदाय के लोग पहले से ही होलिका दहन किया करते थे. लेकिन जब यह जमीन कब्रिस्तान के नाम पर मुस्लिम समुदाय को दिया गया, तब से हिंदूओं को होलिका दहन करने पर रोक लगा दी गई. उन्होंने समाजवादी सरकार पर इल्जाम लगाते हुए कहा कि सपा सरकार में उन्हें न्याय नहीं मिला था. साथ ही उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार में विवादित जमीन की सबूतों को देखा गया और निष्पक्ष तरीके से जांच करने के बाद फैसला दिया गया है. वहीं मुस्लिम पक्षकार अमीर हसन फैसले से नाखुश है. उन्होंने कहा है कि यह कब्रिस्तान था, और कब्रिस्तान हो कर रहेगा.