CAA Rules: सरकार ने 11 मार्च को सीएए को लेकर नोटिफिकेशन जारी किया है. इसके बाद पूरे देश में यह कानून लागू हो गया है. लेकिन पूर्वोत्तर के कुछ इलाके हैं जहां पर इस कानून को लागू नहीं किया जाएगा.
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CAA Rules: बीते रोज पूरे देश में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) 2019 लागू कर दिया गया. गृहमंत्रालय की तरफ से 11 मार्च को इसका नोटिफिकेशन जारी किया गया है. इसके बाद यह पूरे देश में लागू हो गया है. हालांकि CAA कानून देश के कुछ हिस्सों में लागू नहीं होगा. यह इलाके भारत के पूर्वोत्तर में आते हैं. CAA पूर्वोत्तर राज्यों के अधिकांश जनजातीय क्षेत्रों में लागू नहीं किया जाएगा, जिनमें संविधान की छठी अनुसूची के तहत खास दर्जा प्राप्त इलाके भी शामिल हैं.
यहां नहीं लागू होगा
यह कानून सोमवार को लागू हुआ है. कानून के मुताबिक, इसे उन सभी पूर्वोत्तर राज्यों में लागू नहीं किया जाएगा जहां देश के दूसरे हिस्सों में रहने वाले लोगों को यात्रा के लिए ‘इनर लाइन परमिट’ (ILP) की जरूरत होती है. ILP अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मिजोरम और मणिपुर में लागू है. अधिकारियों ने नियमों के हवाले से कहा कि जिन जनजातीय इलाकों में संविधान की छठी अनुसूची के तहत स्वायत्त परिषदें बनाई गई हैं, उन्हें भी सीएए के दायरे से बाहर रखा गया है. असम, मेघालय और त्रिपुरा में ऐसी स्वायत्त परिषदें हैं.
कब पास हुआ बिल?
ख्याल रहे कि भारत में CAA साल 2019 में संसद में पास किया गया. इस कानून को लागू करने के पीछे का मकसद यह है कि भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई मजहब के लोग भारत में नागरिकता ले सकेंगे. इस कानून के पास के बाद भारत में मुसलमानों और नार्थ ईस्ट के लोगों ने इसका विरोध किया था. इस विरोध में तकरीबन सौ लोगों की मौत हो गई थी. कई लोगों को सरकार ने जेल में डाल दिया था.
असम बंगाल संवेदनशील
आपको बता दें कि CAA कानून को लेकर असम और बंगाल में विरोध प्रदर्शन हुए थे. असम में विपक्षी दलों ने सीएए को लागू करने के लिए केंद्र सराकर की आलोचना की है. ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के मुताबिक "हम केंद्र के इस कदम के खिलाफ कानूनी रूप से लड़ाई लड़ेंगे." आसू ने 1979 में अवैध प्रवासियों की पहचान और निर्वासन की मांग को लेकर छह सालों तक आंदोलन किया था." रायजोर दल के अध्यक्ष और विधायक अखिल गोगोई ने कहा, "असम में अवैध रूप से रह रहे 15 से 20 लाख बांग्लादेशी हिंदुओं को वैध बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. सड़क पर आकर इस असंवैधानिक कृत्य के खिलाफ विरोध करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा."