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नई दिल्ली: 15 अगस्त को जब पूरा देश आजादी के जश्न में डूबा हुआ था. देश की एकता, अखंडता, शांति, सद्भाव और तरक्की का संकल्प ले रहा था, तभी कोई चुपके से इस संकल्प को चुनौती दे रहा था. शांति और सद्भाव को नज़र लगा रहा है. समाज के लोगों को आपस में बांटने और भिड़ाने की कोशिश कर रहा था. लेकिन अमनपसंद अवाम ने इस साजिश को नाकाम कर दिया है. फिरकापरस्त ताकतों को कड़ा सन्देश दे दिया है..
हम बात कर रहे हैं बिहार के दरभंगा के सिंहवाड़ा थाना क्षेत्र के रज़ा चौक की.. यहाँ सुबह पौ फटते ही बच्चे ख़ुशी- ख़ुशी हाथों में तिरंगा लेकर स्कूल की तरफ निकल रहे थे..लोग अपने घरों और दुकानों पर तिरंगा फहरा रहे थे. उत्साही नौजवान अपनी बाइक पर तिरंगा लगाकर इधर- उधर घूम रहे थे. लोग आज़ादी के दिन को महसूस कर रहे थे.. तभी रजा चौक पर आज़ादी के खुशनुमा माहौल में कुछ लोगों की नज़र नफरत का जहर घोल रहे कुछ बैनर और पोस्टरों पर गई. इन पोस्टरों पर लिखा था, ' सरदार और मुसलमान भारत छोड़ो', 'सरदार और मुसलमान देश के आतंकवादी हैं',' भारत में अज़ान बंद हो', 'मुसलमान बकरीद में गाय काटते हैं'.
ऐसे भड़काऊ बैनर और पोस्टर देखकर लोग ठिठक गए.. उनके कान खड़े हो गए.. भीड़ जुटने लगी.. किसने लगाया पोस्टर? क्यों लगाया ऐसा पोस्टर ? फिजा में चारों तरफ सवाल पर सवाल तैरने लगे.. भारी भीड़ जमा हो गयी.. पुलिस को तत्काल इस घटना की सूचना दी गई.
मौके पर पहुंचकर पुलिस ने इन आपत्तिजनक पोस्टरों को जब्त कर लिया है.. एस के सुमन सदर डीएसपी कमतौल, ने कहा जो कोई भी इस घटना के पीछे होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा. कानून अपने हिसाब से काम करेगा. हम जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लेंगे.
मौके पर पहुंचे पूर्व विधायक ऋषि मिश्रा ने कहा, " सिंहवाड़ा इलाके में कभी ऐसा नहीं हुआ. इस घटना के पीछे साम्प्रदायिक ताकतें हैं, जो समाज का माहौल बिगाड़ना चाहती है. प्रशासन को इसपर संज्ञान लेकर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए."
ये इलाका मिक्स आबादी वाला इलाका है, जहाँ सभी जाति और धर्म के लोग सुख- शांति और सद्भाव के साथ रहते हैं. ग्रामीण इलाके में इस तरह की घटना से इलाके के लोग संशय और दहशत में हैं. गाँव की मस्जिद के इमाम बारक हसन अंसारी कहते हैं, " यहाँ इस तरह का कोई माहौल नहीं था..पता नहीं कौन ऐसा कर रहा है ? क्या मकसद है उसका. समाज के लोग मिलकर ऐसे लोगों का मुकाबला करेंगे."
घटना के बाद सामज के इज्ज़तदार और रसूखदार लोगों ने इसपर विमर्श किया है. उन्होंने कहा, "लोगों का सब्र और समझदारी अपनी जगह ठीक है, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि आखिर हिन्दू- मुसलमान करके किसे फायदा और किसे नुक्सान होगा? बिहार में चुनावी माह और वक़्त में ऐसी घटनाएं महज इत्तिफाक है या किसी साजिश का हिस्सा, इसकी गाँठ हर अमन पसंद आदमी को खोलनी होगी. हमें आपस में मिलकर साम्प्रदायिक ताकतों से लड़ना होगा, उनसे सतर्क रहना होगा."
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