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हैदराबाद/मासूम सिद्दीकी: आज के वक्त में हर किसी को टेक्नोलॉजी की जानकारी रखनी जरूरी हो गई है. इसके नफे-नुकसान की बात आए दिन सामने आती रहती हैं. अगर इसका सही इस्तेमाल हो तो जिन्दगी काफी आसान हो सकती है. ऐसा ही एक मामला तेलंगाना की एडीशनल डीजीपी स्वाति लकड़ा ने बताया कि क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम का इस्तेमाल लापता बच्चों की तलाश में भी किया जा रहा है. इसकी मदद से अब तक मुल्क भर से 33 बच्चों को उनके परिवार वालों से मिलाया जा चुका है.
टेक्नोलॉजी के बेहतरीन इस्तेमाल का एक मामला तेलंगाना में सामने आया है, जहां पांच साल पहले लापता हुआ एक मासूम अपने मां-बाप से दोबारा मिल सका. अपने कलेजे के टुकड़े को अपनी आंखों के सामने देख कर मां-बाप को भी अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ.
जानकारी के मुताबिक 14 जुलाई, 2015 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद का रहने वाला एक बच्चा लापता हो गया था. अहलेखाना और पुलिस ने उसकी काफी तलाश की लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला. तकरीबन एक हफ्ता पहले तेलंगाना पुलिस के चेहरा पहचानने वाले ऐप 'दर्पण' की मदद से बच्चे का पता चला. वह असम के गोलपारा में स्थित एक बाल विकास में रह रहा था. तेलंगाना पुलिस ने फौरन बच्चे का पता लगाया और उसे हैदराबाद लेकर आ गई.
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