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लखनऊ: निज़ामुद्दीन मरकज़ में शामिल हुए जमातियों के मुल्क के अलग-अलग कोने में छिपे होने की खबरों के बीच दारुल उलूम फिरंगी महल लखनऊ ने एक फतवा जारी किया है. जिसमें इस्लाम के मानने वालों को कोरोना का टेस्ट कराने के लिए कहा गया है. फिरंगी महली ने फतवे के ज़रिए कहा है कि कोरोना को छिपाना कतई जायज़ नहीं है, अगर लोग महामारी में अपना इलाज और टेस्ट नहीं कराते हैं तो ये बिल्कुल गैर शरई है. इस्लाम में एक इंसान की जान बचाना कई इंसानों की जान बचाने जैसा है.
गौरतलब है कि फतवा ऐसे वक्त में आया है, जब कोरोना बोहरान के बीच हुए निज़ामुद्दीन मरकज़ के इनेकाद पर सवाल उठ रहे हैं. अब तक आई जांच रिपोर्ट में लगभग 400 लोगों में कोरोना की तस्दीक हो चुकी है. जबकि कुछ रिपोर्ट्स का आना अभी बाकी है. फिक्र की बात ये है कि हज़ारों की तादाद में मरकज़ में शामिल होकर लौटे जमाती मुल्क के अलग-अलग कोने तक पहुंच चुके हैं. वे न तो खुद सामने आ रहे हैं और ना ही कोरोना टेस्ट कराने के लिए मान रहे हैं.
Darul Uloom Firangi Mahal Lucknow today issued a 'Fatwa' that getting tested and treated for Coronavirus is important for all, and hiding this disease is a crime. Putting one's own and lives of others in danger is forbidden in Islam: Maulana Khalid Rashid Firangi Mahali pic.twitter.com/NBi5LcNeIt
— ANI UP (@ANINewsUP) April 2, 2020
दूसरी जानिब सहारनपुर में दारुल उलूम देवबंद की जानिब से कोरोना बोहरान पर मस्जिद में एक साथ सिर्फ 5 लोगों के नमाज़ पढ़ने को कहा गया है . इसके लिए उन्होंने फतवा भी जारी किया है. फतवे के मुताबिक मस्जिदों में इमाम समेत पांच लोग ही सोशल डिस्टेंसिंग पर अमल करते हुए नमाज़ अदा करें. इसके अलावा सभी लोग अपने-अपने घरों में रहकर ही नमाज पढ़ें. उलेमाओं ने कहा कि कोरोना की रोकथाम पर बने कानून को संजीदगी से लेने की ज़रुरत है.
इसके अलावा जमीअत उलेमा-ए-हिंद के जनरल सैक्रेटरी मौलाना महमूद मदनी भी कहा है कि सोशल डिस्टेंसिंग पर अमल करना बेहद ज़रूरी है. चाहे वो नमाज़ के वक्त ही क्यों ना हो. इतना ही मौलाना महमूद मदनी ने सोशल डिस्टेंसिंग पर अमल ना करना यानी सोशल डिस्टेंसिंग को तोड़ना हराम करार दिया है, भले ही वो नमाज़ के नाम पर ही क्यों ना हो.
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