Delhi Cemetery Demolition: दिल्ली के डीएनडी रोड पर 30 साल पुराने कब्रिस्तान पर डीडीए ने बुलडोज़र चला दिया. कब्रें तोड़ी गई हैं. मुस्लिम समुदाय में आक्रोश है. पूरी खबर पढ़ने के लिए नीचे स्क्रॉल करें.
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Delhi Cemetery Demolition: देशभर में मुसलमानों के कथित अवैध धार्मिक स्थलों पर लगातार बुलडोजर चलाया जा रहा है. उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तराखंड तक मदरसों, मस्जिदों, दरगाहों और कब्रिस्तानों पर बुलडोजर एक्शन हो रहा है. अब दिल्ली से एक बड़ी खबर आई है, जहां निवास नगर में एक कब्रिस्तान पर डीडीए का बुलडोजर चला. यह कार्रवाई सुबह 4 बजे की गई.
कब्रिस्तान प्रबंधन कमेटी के चीफ रिजवान अहमद ने इस मामले को लेकर दिल्ली वक्फ बोर्ड को चिट्ठी लिखी है. उन्होंने बताया कि निवासोक नगर और आस-पास के इलाकों में काफी तादाद में मुस्लिम लोग रहते हैं. सभी धर्मों के मुताबिक यहां सुविधाएं दी जाती थीं, और ये कब्रिस्तान भी कई सालों से मुस्लिम समुदाय के लोगों को दफनाने की जगह थी. खसरा नंबर 70 में करीब 6 बीघा जमीन पर बना यह कब्रिस्तान 30 साल से ज्यादा पुराना है. यहां कई कब्रें सीमेंट और पक्की बनी हुई थीं. कब्रिस्तान की देखरेख और विकास के लिए एसडीएम ऑफिस की तरफ से फंड भी पास हुआ था लेकिन इसके बावजूद डीडीए ने बिना नोटिस और जानकारी के कब्रिस्तान को तोड़ दिया.
सरकारी फंड हुआ था जारी
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कब्रिस्तान की चारदीवारी बनाने के लिए करीब 60 लाख रुपये की मंज़ूरी दी गई थी. लेकिन इसके कुछ ही दिन बाद, 19 मई 2025 की रात कब्रिस्तान का निरीक्षण किया गया और फिर 20 मई की सुबह करीब 4 बजे बुलडोज़र लगाकर कब्रिस्तान को पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया.
मकामी लोगों ने क्या कहा?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां उनके परिवार के कई लोग दफनाए गए थे. कब्रों को बुलडोजर से तोड़ने और अपवित्र करने की घटना से इलाके के मुस्लिम समुदाय में आक्रोश है. यह कब्रिस्तान दिल्ली वक्फ बोर्ड में ऑडिट रिपोर्ट के साथ रजिस्टर्ड है. नेवा शुक नगर और चल्ला गांव के आसपास बड़ी तादाद में मुसलमान रहते हैं, लेकिन अब आसपास कोई कब्रिस्तान नहीं बचा. कब्रिस्तान कमेटी और स्थानीय लोगों ने दिल्ली वक्फ बोर्ड से अपील की है कि इस जमीन को दोबारा कब्रिस्तान के तौर पर बहाल किया जाए, ताकि मुस्लिम समुदाय के लोगों को दफनाने की सुविधा मिल सके.