वज़ीरे दिफा ने कहा कि हाउस इस बात से आगाह है कि हिंदुस्तान और चीन सरहद का सवाल अभी तक अनसुलझा है. हिंदुस्तान और चीन की बाउंड्री का कस्टमरी और ट्रेडिशनल अलाइनमेंट चीन नहीं मानता है.
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नई दिल्ली: वज़ीरे दिफा (Defence Minister) राजनाथ सिंह ने आज राज्यसभा में हिंदुस्तान और चीन सरहदी कशीदगी पर बोलते हुए कहा कि चीन रस्मी बॉर्डर को नहीं मानता. उसकी कथनी और करनी में फर्क है. लगातार उकसावे की कार्रवाई कर रहा है. चीन ने LAC की जूं की तूं हालत को बदलने की कोशिश की.
वज़ीरे दिफा ने कहा कि हाउस इस बात से आगाह है कि हिंदुस्तान और चीन सरहद का सवाल अभी तक अनसुलझा है. हिंदुस्तान और चीन की बाउंड्री का कस्टमरी और ट्रेडिशनल अलाइनमेंट चीन नहीं मानता है. यह सरहदी लाइन अच्छे से कायम जुगराफियाई उसूलों (भौगोलिक सिद्धांतों) की बुनियाद पर है. उन्होंने आगे कहा कि चीन मानता है कि बाउंड्री अभी भी रस्मी तरीके से तय नहीं है. उसका मानना है कि हिस्टोरिक्ल जुरिस्डिक्शन की बुनियाद पर जो ट्रेडिश्नल कस्टमरी लाइन है उसके बारे में दोनों मुल्कों की अलग तशरीह (व्याख्या) है. 1950-60 की दहाई में इस पर बातचीत हो रही थी लेकिन कोई हल नहीं निकला.
राजनाथ सिंह ने बताया कि पिछली कई दहाइयों में चीन ने बड़े पैमाने पर इन्फ्रास्ट्रक्चर एक्टिविटी शुरू की है, जिससे बॉर्डर एरिया में उनकी तैनाती की सलाहियत बढ़ी है. इसके जबाव में हमारी हुकूमत ने भी बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर तरक्की का बजट बढ़ाया है जो पहले से लगभग दोगुना हुआ है. इसके की वजह से हमारे जवान सरहदी इलाकों में ज्यादा अर्लट रह सकते हैं और ज़रूरत पड़ने पर बेहतर जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं.
यह हकीकत है कि हम लद्दाख में एक चुनौती के दौर से गुज़र रहे हैं लेकिन साथ ही मुझे भरोसा है कि हमारा मुल्क और हमारे बहादुर जवान इस चुनौती पर खरे उतरेंगे. मैं इस हाउस से गुज़ारिश करता हूं कि हम एक आवाज़ से अपनी फौज की बहादुरी और उनके बेमिसाल हिम्मत के तईं ऐज़ाज़ पेश करें.
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