)
Ajmer Dargah Controversy: देश और दुनिया में मशहूर अजमेर शरीफ दरगाह एक बार फिर सुर्खियों में है. दिल्ली हाईकोर्ट ने दरगाह से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर अल्पसंख्यक मंत्रालय अजमेर दरगाह कमेटी के नाजिम मोहम्मद बिलाल खान, असिस्टेंट नाजिम मोहम्मद आदिल और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है. कोर्ट ने सभी पक्षों को 30 अक्टूबर तक अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है.
दरअसल, दरगाह के खादिम सैयद मेहराज चिश्ती ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी और अपनी याचिका में गंभीर आरोप लगाए हैं. सैय्यद मेहराज चिश्ती ने कोर्ट को बताया, "दरगाह परिसर में लगे CCTV कैमरों की निगरानी और रखरखाव में भारी लापरवाही बरती गई है, जिससे आस्ताने की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
दायर याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप
दायर याचिका में कहा गया है कि CAG की रिपोर्ट में भी कई वित्तीय अनियमितताएं और प्रक्रियागत खामियां उजागर हुई हैं, जिन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. इसके अलावा, दरगाह कमेटी की नई तश्कील पिछले तीन सालों से नहीं की गई, जिससे संस्थागत कामकाज पर असर पड़ा है. खादिम सैय्यद मेहराज चिश्ती ने यह भी आरोप लगाया कि दरगाह कमेटी के कर्मचारियों के साथ लगातार नाइंसाफी हो रही है. उन्होंने दावा किया कि काम के दबाव और अन्यायपूर्ण रवैये के चलते कुछ कर्मचारियों ने आत्महत्या जैसे कदम तक उठाए हैं.
उठा गंभीर सवाल
इसके अलावा, याचिका में सोशल मीडिया पर दरगाह अजमेर शरीफ और हजरत ख्वाजा गरीब नवाज़ रहमतुल्लाह अलैहि के खिलाफ 140 से ज्यादा आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों पर अब तक कोई कार्रवाई न होने पर भी सवाल उठाए गए हैं. दिल्ली हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी संबंधित विभागों से विस्तृत जवाब मांगा है. कोर्ट ने कहा है कि दरगाह से जुड़ी धार्मिक, प्रशासनिक और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है.