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न्यूयॉर्कः बढ़ती उम्र का असर न सिर्फ हमारी जिस्मानी सलाहियत पर पड़ता है बल्कि इससे चीजों को याद रखने की क्षमता भी प्रभावित होती है, जिसे रोकने में कसरत काफी हद तक मददगार है. उम्रदराज लोगों को भूलने की आदत होने लगती है और इससे उनमें अल्जाईमर रोग अधिक प्रभावी होकर जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है.
हफ्ते में तीन बार करनी होगी वर्जिश
एक नए रिसर्च में सामने आया है कि पचास वर्ष और साठ वर्ष की उम्र में हफ्ते में तीन बार कसरत करना जैसे साइकिल चलाना, तेजी से पैदल चलना और जॉगिंग करने से न सिर्फ हमारी मांसपेशियां मजबूत होती हैं बल्कि यह हमारे मस्तिष्क की कोशिकाओं के लिए भी फायदेमंद है. इससे चीजों को याद रखने की हमारी क्षमता बरकरार रहती है.
व्यायाम करने से ऐपिसोडिक मेमोरी में होता है सुधार
पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय में केनेथ पी. डिट्रिच स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज में डॉक्टरेट की छात्रा सारा अगहजयन ने कहा है कम से कम चार महीने के लिए सप्ताह में लगभग तीन बार व्यायाम करने से आपकी ऐपिसोडिक मेमोरी में सुधार आ सकता है. यह हमारे मस्तिष्क की वह क्षमता है जो हमें अतीत में हुई घटनाओं की याद दिलाती है लेकिन बढ़ती उम्र के साथ सबसे पहले इसी क्षमता में कमी आती है.
3,000 से ज्यादा प्रतिभागियों पर किया गया अध्ययन
ऐसे व्यायाम जिनसे दिल की रक्त पंप करने की क्षमता में इजाफा होता है वे मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बढ़ाने में भी कारगर पाए गए हैं. इस बात को समझने के लिए शोध टीम ने 3,000 से अधिक प्रतिभागियों पर 36 से अधिक अध्ययन किए हैं. सारा ने कहा कि हमने पाया कि 69 से 85 साल की उम्र के लोगों की तुलना में 55 से 68 साल की उम्र के लोगों की याददाश्त में अधिक सुधार हुआ है, इसलिए चीजों को बिगड़ने से पहले ही एहतियात बरती जानी जरूरी है.
’कम्युनिकेशंस मेडिसिन’ जर्नल में प्रकाशित हुआ है लेख
इस शोध के निष्कर्ष ’कम्युनिकेशंस मेडिसिन’ जर्नल में प्रकाशित हुए हैं. इस शोध से एक बात सामने आई है कि व्यायाम एक सहज तरीका है जिससे बढ़ती उम्र में स्मृति लोप को रोका जा सकता है. सारा ने कहा कि आपको कुछ ज्यादा नहीं करना है और बस पैदल चलने के लिए जूतों की एक अच्छी जोड़ी चाहिए जिसे पहन कर आप बाहर निकल कर थोड़ी बहुत कसरत कर सकते हैं.
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