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Fani Badayuni Poetry: फानी बदायुनी उर्दू के मशहूर शायर थे. फानी की पैदाइश 13 सितंबर 1879 को उत्तर प्रदेश के जिला बदायूं में हुई. पहले उनका तख़ल्लुस शौकत था, इसके बाद उन्होंने फ़ानी कर लिया. फानी ने ग्यारह साल की उम्र में शायरी शुरू की. 1898 ई. में उनका पहला दीवान संकलित हो गया था. उनके वालिद शायरी के सख्त खिलाफ थे इसलिए वह इसे छपवा नहीं सके.
हम हैं उस के ख़याल की तस्वीर
जिस की तस्वीर है ख़याल अपना
ज़िंदगी जब्र है और जब्र के आसार नहीं
हाए इस क़ैद को ज़ंजीर भी दरकार नहीं
मेरे जुनूँ को ज़ुल्फ़ के साए से दूर रख
रस्ते में छाँव पा के मुसाफ़िर ठहर न जाए
इक मुअम्मा है समझने का न समझाने का
ज़िंदगी काहे को है ख़्वाब है दीवाने का
आते हैं अयादत को तो करते हैं नसीहत
अहबाब से ग़म-ख़्वार हुआ भी नहीं जाता
यूँ चुराईं उस ने आँखें सादगी तो देखिए
बज़्म में गोया मिरी जानिब इशारा कर दिया
जवानी को बचा सकते तो हैं हर दाग़ से वाइ'ज़
मगर ऐसी जवानी को जवानी कौन कहता है
दुनिया मेरी बला जाने महँगी है या सस्ती है
मौत मिले तो मुफ़्त न लूँ हस्ती की क्या हस्ती है
सुने जाते न थे तुम से मिरे दिन रात के शिकवे
कफ़न सरकाओ मेरी बे-ज़बानी देखते जाओ
ना-उमीदी मौत से कहती है अपना काम कर
आस कहती है ठहर ख़त का जवाब आने को है
आबादी भी देखी है वीराने भी देखे हैं
जो उजड़े और फिर न बसे दिल वो निराली बस्ती है