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नई दिल्ली: अपने बयानों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहने वाले जम्मू-कश्मीर के साबिक वज़ीरे आला और लोक सभा एमपी फारूक अब्दुल्ला (Farooq Sbdullah) ने एक बार मुतनाज़ा (विवादित) बयान दिया है. एक इंटव्यू में उन्होंने कहा है कि जम्मू-कश्मीर के लोग खुद को हिंदुस्तानी ही नहीं मानते और न ही वे हिंदुस्तानी होना चाहते हैं. इसके बदले वो चाहते हैं कि चीन उन पर हुकूमत करे.
उन्होंने कहा कि अगर आप कश्मीरियों से बात करें तो कई लोग चाहेंगे कि चीन भारत में आ जाए. आप जाइए और वहां किसी से भी बात कीजिए. वे खुद को हिंदुस्तानी नहीं मानते हैं और न ही पाकिस्तानी. वे चाहते हैं कि उनपर चीन हुकूमत करे. जबकि उन्हें पता है कि चीन ने मुस्लिमों के साथ क्या किया है. अब्दुल्ला ने कहा कि मैं यह आपको साफ कर दूं कि पिछले साल 5 अगस्त को उन्होंने (मोदी हुकूमत) जो किया, वह ताबूत में आखिरी कील था.'
उन्होंने आगे कहा कि यह जम्मू कश्मीर के लोगों का मूड है क्योंकि कश्मीरियों को हुकूमत पर कोई भरोसा नहीं रह गया है. बंटवारे के वक्त वादी के लोगों का पाकिस्तान जाना आसान था लेकिन तब उन्होंने गांधी के हिंदुस्तान को चुना था न कि मोदी के हिंदुस्तान को.
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