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नई दिल्ली : निज़ामुद्दीन जमाती मरक़ज़ को पूरी तरह खाली करा लिया गया है करीब 2100 लोगों को बाहर निकाल लिया गया है. बता दें कि मरकज़ ने दावा किया था कि वहां केवल एक हज़ार लोगों के होने का दावा किया था.बता दें कि निज़ामुद्दी जमाती मरकज़ के मामले के खुलासे के बाद कई रियासतों में कोरोना से मुतास्सिर होने की ख़बरें भी आई थीं और भी कई रियासतों में लोगों के शामिल होने के बाद हजारों लोगों को कोरोना का खतरा मंडरा रहा है.
हालांकि जमाती मरकज़ी के इस मामले के बाद एक बार फिर से मज़हब को लेकर सियासत शुरू हो गई है.इस मामले में जम्मू कश्मीर के साबिक सीएम उमर अब्दुल्ला भी कूद पड़े हैं. उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस फैलाने का इल्ज़ाम मुस्लिमों पर नहीं थोपा जा सकता. नेश्नल कॉन्फ्रेंस के लीडर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इसके बाद कुछ लोगों को बहाना मिल जाएगा कि जैसे मुसलमानों ने दुनियाभर में कोरोनावायरस फैलाया.
Now the #TablighiJamat will become a convenient excuse for some to vilify Muslims everywhere as if we created & spread #COVID around the world.
— Omar Abdullah (@OmarAbdullah) March 31, 2020
जमाती मरकज़ी मामले को लेकर उमर अब्दुल्ला एक और ट्वीट करते हुए लिखा, कि "अब कुछ लोगों के लिए तबलीगी जमात सबसे आसान बहाना बन जाएगा कि वे हर जगह मौजूद मुस्लिमों को गाली दे सकें, जैसे मुस्लिमों ने ही कोरोना पैदा किया हो और पूरी दुनिया में फैला दिया हो। देश के ज्यादातर मुसलमानों ने सरकारी नियमों और सलाहों का ठीक उसी तरह पालन किया है, जैसे कि किसी और ने किया।"
At first glance it would appear the #TablighiJamat were nothing if not irresponsible in the way they went about things but that’s not unique to them. The majority of Muslims in India have heeded government guidelines & advice the same as anyone else.
— Omar Abdullah (@OmarAbdullah) March 31, 2020
उन्होंने कहा कि तब्लीगी वायरस जैसे हैश टैग के साथ ट्वीट करने वाले लोग किसी भी वायरस के मवाज़ने ज़्यादा खतरनाक होते हैं, क्योंकि ऐसा करने वाले लोगों के दिमाग बीमार होते हैं, जबकि उनके जिस्म सेहतमंद हो सकते हैं।
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