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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में जब राम मंदिर का मामला चल रहा था, तब दोनों फरीक (राम मंदिर/बाबरी मस्जिद) के लोग कहा करते थे कि जो भी फैसला आएगा, उसको तस्लीम करेंगे. सबको उम्मीद भी यही थी कि फैसला आएगा तो इस सबसे लम्बे तनाज़े पर बहस बंद हो जाएगी. फैसला आया और राम मंदिर की बुनियाद भी वज़ीरे आज़म नरेन्द्र मोदी के ज़रिये रख दी गई लेकिन इस मुद्दे पर बयान देने का सिलसिला थमा नहीं है. अब साबिक मरकज़ी वज़ीर शकील अहमद ने अपने बयानों से फिर से तनाज़ा खड़ा कर दिया है.
शकील अहमद ने ट्वीट कर राम मंदिर मामले में सवाल खड़े किए. शकील अहमद ने कहा कि' बाबर पहली बार 1526 मे राणा सांगा की मदद से हिंदुस्तान आया. फिर 1 साल मे ही इतना मज़बूत कैसे हो गया कि भगवान राम की जायपैदाइश के मंदिर को तोड़ कर 1527-28 मे मस्जिद बना दी. और हमारे पूर्वज ख़ामोश रहे? पूर्वज का मतलब हिन्दू-मुस्लिम दोनों से है. हिंदुस्तान में मुस्लिम 24% ही थे, बाबर तो बाहरी था.
बाबर पहली बार 1526 मे राणा सांगा की मदद से भारत आया।फिर 1 साल मे ही इतना मज़बूत कैसे हो गया कि भगवान राम के जन्मस्थान के मंदिर को तोड़ कर 1527-28 मे मस्जिद बना दिया और हमारे पूर्वज ख़ामोश रहे? पूर्वज का मतलब हिन्दू मुस्लिम दोनो से है। भारत मे मुस्लिम 24% ही थे।
बाबर तो बाहरी था। pic.twitter.com/WnpGoJTzES— Shakeel Ahmad (@Ahmad_Shakeel) August 6, 2020
शकील अहमद ने बुध के रोज़ भी एक ट्वीट करके मुल्क की अकलियती आबादी के लोगों को मुस्तकबिल की फिक्र करने की सलाह दे डाली थी. शकील ने लिखा कि "हमारे समाज के 80 फीसद आबादी वाले जब 15 फीसद वालों के धरोहरों को इस तर्क के साथ कब्ज़ा करने लगें कि तुम्हारे आबा-ओ-अजदाद ने इसे हमारे आबा-ओ-अजदाद से सैकड़ों साल पहले छीन लिया था तो 15 फीसद वालों को अपनी अगली नस्ल के मुस्तकबिल के बारे मे ज़रूर फिक्र होनी चाहिये."
बता दें कि शकील अहमद अकेले नहीं है, जिनकी तरफ से राम मंदिर की बुनियाद रखने के बाद ये बयान आए हों, बल्कि ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने तो इस मामले में तुर्की की हागिया सोफिया मस्जिद की मिसाल तक दे दी है. जिसको हाल ही में म्यूज़ियम से मस्जिद में तब्दील किया गया है. वहीं एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन उवैसी ट्वीट से लेकर टीवी तक ये बात कहते दिख रहे है कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद थी और रहेगी.
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