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Bihar Election: गोविंदगंज सीट पर 14 फीसदी मुस्लिम वोटर्स, 14 बार जीते ब्राह्मण उमीदवार

Govindganj Assembly Elections 2025: बिहार के गोविंदगंज विधानसभा का नाम आते ही जातीय समीकरण, मुस्लिम वोट बैंक और ब्राह्मण वर्चस्व की चर्चा शुरू हो जाती है. आगामी विधानसभा चुनाव में गोविंदगंज सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो सकता है. जानिए क्या है सीट पर समीकरण...

Bihar Election: गोविंदगंज सीट पर 14 फीसदी मुस्लिम वोटर्स, 14 बार जीते ब्राह्मण उमीदवार

Bihar Election 2025: बिहार में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं. इस चुनाव में लोग अपनी-अपनी विधानसभा सीटों का समीकरण जानने के लिए काफी उत्सुक रहते हैं. ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि बिहार की गोविंदगंज विधानसभा सीट पर क्या समीकरण बन रहे हैं. आइए जानते हैं. 

दरअसल, गोविंदगंज विधानसभा का नाम आते ही जातीय समीकरण, मुस्लिम वोट बैंक और ब्राह्मण वर्चस्व की चर्चा शुरू हो जाती है. यह विधानसभा सीट न सिर्फ ब्राह्मण बहुल मानी जाती है, बल्कि यहां के मतदाताओं का रुझान लंबे समय तक क खास जातीय ध्रुवीकरण में रहा है. साल 1952 के विधानसभा चुनाव से लेकर अब तक के 17 विधानसभा चुनावों में 14 बार ब्राह्मण उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है. इस सीट पर सिर्फ 3 बार ही भूमिहार उम्मीदावर की जीत हुई है. यह रिकॉर्ड बताता है कि इस इलाके में ब्राह्मण वोटरों की पकड़ कितनी मजबूत है. 

खास बात ये है कि इस कहानी के अहम किरदार मुसलमान हैं. गोविंदगंज विधानसभा में 14 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं. जब ब्राह्मण वोट दो या तीन हिस्सों में बंट जाते हैं तो उस वक्त मुसलमानों की भूमिका काफी अहम हो जाती है, इसका उदाहरण साल 2015 का विधानसभा चुनाव है. एक तरफ महागठबंधन के उम्मीदवार ब्रजेश कुमार थे तो दूसरी तरफ एनडीए के उम्मीदवार और लोजपा नेता राजू तिवारी थे, दोनों के बीच कड़ी टक्कर होने की संभावना थी लेकिन इस चुनाव में मुस्लिम वोट फैक्टर महागठबंधन के लिए घातक साबित हुआ और राजू तिवारी करीब 28 हजार वोटों से जीत गए. राजू तिवारी को 74685 और ब्रजेश कुमार को 46765 वोट मिले. इस चुनाव में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि राजू तिवारी के मुसलमानों से अच्छे व्यक्तिगत संबंध हैं और यही वजह है कि कुछ मुसलमानों ने राजू तिवारी को जमकर वोट दिया.

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2020 के चुनाव में मुसमलानों की अहम भूमिका
वहीं, 2020 के विधानसभा चुनाव में यह सीट बीजेपी के खाते में गई और लोजपा ने भी यहां से अपना उम्मीदवार उतारा. 2020 का विधानसभा मुकाबला त्रिकोणीय लग रहा था क्योंकि महागठबंधन से ब्रजेश कुमार, भाजपा से सुनील मणि त्रिपाठी और लोजपा उम्मीदवार राजू तिवारी यहां से चुनावी मैदान में थे. इस चुनाव में राजू तिवारी को 31,300 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार ब्रजेश कुमार को 37,620 वोट मिले. बीजेपी उम्मीदवार सुनील मणि तिवारी ने इस सीट पर जीत हासिल की और उन्हें 65,544 वोट मिले. इस चुनाव ने साबित कर दिया कि इस सीट पर मुसलमान निर्णायक भूमिका निभाते हैं, लेकिन अगर वोटों का बंटवारा नहीं हुआ तो.

गोविंदगंज विधानसभा चुनाव 2025 (Govindganj Assembly Elections 2025)
आगामी विधानसभा चुनाव में गोविंदगंज सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो सकता है. एनडीए की ओर से मौजूदा विधायक सुनील मणि तिवारी के फिर से चुनाव लड़ने की संभावना है, जबकि पूर्व विधायक राजू तिवारी लोजपा (रामविलास) से दावेदारी पेश कर सकते हैं. महागठबंधन (कांग्रेस) की तरफ से ब्रजेश पांडे या किसी नए चेहरे को मैदान में उतारा जा सकता है. अगर बीजेपी और लोजपा दोनों ब्राह्मण उम्मीदवार उतारते हैं, तो ब्राह्मण वोटों का बंटवारा होगा, जिससे मुस्लिम वोट बैंक और OBC के एकजुट समर्थन से महागठबंधन को बढ़त मिल सकती है और चुनावी समीकरण बदल सकते हैं.

गोविंदगंज की समस्या
गोविंदगंज विधानसभा में अरेराज और पहाड़पुर प्रखंड शामिल हैं. गंडक नदी के किनारे बसा एक इलाका है जहां हर साल बाढ़ से फसलें, घर और सड़कें तबाह हो जाती हैं. स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएं सीमित हैं, जिससे युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाना पड़ता है. रोजगार के अवसर लगभग नहीं है. जिसके कारण बड़ी संख्या में लोग नेपाल, दिल्ली, पंजाब, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं. पलायन के कारण गांवों में महिलाओं और बुजुर्गों पर अतिरिक्त ज़िम्मेदारियां आ जाती हैं. 

गोविंदगंज के विधायकों की लिस्ट

1952: श्योदारी पांडे कांग्रेस 
1957: ध्रुव नारायण मणि त्रिपाठी - कांग्रेस 
1962: ध्रुव नारायण मणि त्रिपाठी - कांग्रेस 
1967: ध्रुव नारायण मणि त्रिपाठी - कांग्रेस 
1969: हरि शंकर शर्मा - भारतीय जन संघ  
1972: रमा शंकर पांडे - कांग्रेस  
1977: रमा शंकर पांडे - कांग्रेस
1980: रमा शंकर पांडे - कांग्रेस
1985: योगेंद्र पांडे - निर्दलीय  
1990: योगेंद्र पांडे- जनता दल  
1995: देवेंद्र नाथ दुबे - समता पार्टी  
1998: भूपेंद्र नाथ दुबे- समता पार्टी
2000: राजन तिवारी - निर्दलीय  
2005: मीना द्विवेदी - जनता दल (यूनाइटेड)  
2010: मीना द्विवेदी - जनता दल (यूनाइटेड)
2015: राजू तिवारी - लोक जनशक्ति पार्टी  
2020: सुनील मणि तिवारी - बीजेपी

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Tauseef Alam

तौसीफ आलम पिछले चार सालों से पत्रकारिता के पेशे में हैं. उन्होंने देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जामिया मिल्लिया इस्लामिया से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है. Amar Ujala,Times Now...और पढ़ें

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